इंदौर। मध्य प्रदेश के इंदौर शहर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी पीने से फैली बीमारी ने लोगों में दहशत का माहौल पैदा कर दिया है। इस बीच क्षेत्रीय विधायक और नगरीय प्रशासन, आवास एवं शहरी विकास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने खुद घटनास्थल का दौरा किया और तंग गलियों में जाकर पीड़ित परिवारों से मुलाकात की।
स्थानीय लोगों और पीड़ित परिजनों का दावा है कि इस घटना में अब तक 13 लोगों की मौत हो चुकी है, लेकिन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने इस दावे को सिरे से नकार दिया। उन्होंने स्पष्ट कहा, “मेरे पास 9 मौतों की जानकारी है।” आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार अब तक केवल 4 मौतें ही दर्ज की गई हैं। मौतों के आंकड़ों को लेकर सरकारी दावों, मंत्री के बयान और स्थानीय लोगों के दावों में बड़ा अंतर देखा जा रहा है, जिससे मामले में और असमंजस बढ़ गया है।
मंत्री विजयवर्गीय के अनुसार, इलाके में दूषित पानी से अब तक करीब 1400 लोग बीमार हो चुके हैं, जिनमें से 200 मरीज विभिन्न अस्पतालों में भर्ती हैं। राहत की बात यह है कि फिलहाल कोई भी मरीज खतरे के घेरे में नहीं है और सिर्फ एक मरीज को वेंटीलेटर पर रखा गया है। सरकार की पूरी कोशिश है कि किसी भी कीमत पर लोगों की जान बचाई जाए।
मंत्री ने आगे कहा कि जिन मरीजों ने निजी अस्पतालों में अपने खर्च पर इलाज कराया है, उनकी सूची तैयार कर ली गई है और सरकार उनके सारे खर्च वापस करेगी। साथ ही प्रभावित परिवारों के लिए मुआवजे की भी घोषणा की गई है।यह घटना ऐसे समय में सामने आई है जब इंदौर को लगातार वर्षों तक देश का सबसे स्वच्छ शहर घोषित किया जाता रहा है, लेकिन अब दूषित पानी के कारण जनता में सरकार के प्रति रोष देखा जा रहा है। विपक्षी दल कांग्रेस ने इस मामले में बीजेपी पर निशाना साधते हुए मंत्री के इस्तीफे की मांग भी की है।
प्रशासन लगातार स्थिति पर नजर रखे हुए है और जांच जारी है। लोग फिलहाल नलों का पानी इस्तेमाल करने से बच रहे हैं और बोतलबंद पानी का सहारा ले रहे हैं।
