नई दिल्ली। ईरान के विदेश मंत्रालय ने बड़ा बयान जारी करते हुए कहा है कि होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों को गुजरने के लिए ईरान की नौसेना के साथ तालमेल बिठाना अनिवार्य होगा। मंत्रालय के प्रवक्ता ने मेहर समाचार एजेंसी को दिए बयान में स्पष्ट किया कि क्षेत्र में अमेरिका और इजरायल द्वारा पैदा की गई असुरक्षा जहाजों की आवाजाही को प्रभावित कर सकती है, लेकिन ईरान नहीं चाहता कि यह जलडमरूमध्य असुरक्षित बने। इसलिए जहाजों को ईरान की नौसेना से समन्वय करना होगा ताकि समुद्री सुरक्षा बनी रहे।
रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने गुरुवार को कहा कि होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों को ईरान की नौसेना से बातचीत करनी होगी। इससे संकेत मिलता है कि ईरान की नौसेना इस महत्वपूर्ण जलमार्ग पर पूरी नजर रखे हुए है और इसका नियंत्रण बनाए हुए है। ईरान ने यह भी संकेत दिया है कि इजरायल और अमेरिका समर्थित जहाजों को छोड़कर अन्य देशों के जहाजों को अनुमति दी जा सकती है, लेकिन हमला करने वाले देशों के जहाजों को सुरक्षित आवागमन नहीं मिलेगा। ईरान के उप विदेश मंत्री ने भी कहा कि कुछ देशों ने सुरक्षित गुजरने के लिए संपर्क किया और ईरान ने उनके साथ सहयोग किया, लेकिन आक्रमण में शामिल देशों को यह लाभ नहीं मिलना चाहिए।
इस बीच, ईरान के नए सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई ने अपने पहले बयान में कहा कि ईरान अपनी लड़ाई जारी रखेगा और अमेरिका-इजरायल के खिलाफ दबाव के तौर पर होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद रखेगा। तेल आपूर्ति में बाधा के कारण वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतें बढ़ी हैं, जहां ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर प्रति बैरल के पार और डब्ल्यूटीआई 95 डॉलर से ऊपर कारोबार कर रहा है। ईरान का कहना है कि वह कीमतों को 200 डॉलर तक ले जाएगा और युद्ध अभी समाप्त नहीं होगा।
