तेहरान/यरूशलम)। अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच 40 दिनों तक चले युद्ध के बाद बुधवार को सीजफायर लागू हो गया। इस दौरान ईरान ने इजरायल पर 650 बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं, जिनमें आधे से अधिक में क्लस्टर बम लगे थे। युद्ध की शुरुआत 28 फरवरी 2026 को अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान के खिलाफ अभियान से हुई थी।
ईरान के मिसाइल हमलों में कम से कम 20 इजरायली और विदेशी नागरिक मारे गए, जबकि वेस्ट बैंक में चार फिलिस्तीनी मौतें हुईं। इजरायल में 7,000 से अधिक लोग घायल हुए। युद्ध के पहले दिन ईरान ने लगभग 80 मिसाइलें दागीं, दूसरे दिन करीब 60 और तीसरे दिन लगभग 30 मिसाइलें। इसके बाद सीजफायर तक औसतन रोज 10-20 मिसाइलें दागी गईं। इन हमलों से इजरायल में घरों को नुकसान पहुंचने के कारण 5,500 से अधिक नागरिक विस्थापित हुए।
जवाबी कार्रवाई में इजरायली वायु सेना ने ईरान पर 10,800 से अधिक हवाई हमले किए। इन हमलों में 18,000 से अधिक बम गिराए गए। इजरायल ने ईरान की वायु रक्षा प्रणालियों, बैलिस्टिक मिसाइल लॉन्चरों, हथियार उत्पादन स्थलों, परमाणु सुविधाओं और सैन्य कमांड केंद्रों समेत 4,000 से अधिक लक्ष्यों को निशाना बनाया। ईरान के लगभग 470 बैलिस्टिक मिसाइल लॉन्चरों में से करीब 60 प्रतिशत नष्ट या निष्क्रिय कर दिए गए। इसके अलावा ईरान की लगभग 85 प्रतिशत हवाई रक्षा और पहचान प्रणालियां भी नष्ट हो गईं।सीजफायर के बाद दोनों पक्षों के बीच तनावपूर्ण शांति बनी हुई है। युद्ध में ईरान की सैन्य क्षमताओं को काफी नुकसान पहुंचा है।
युद्ध की शुरुआत और शुरुआती हमले
इस संघर्ष की शुरुआत 28 फरवरी 2026 को अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान के खिलाफ संयुक्त सैन्य अभियान से हुई। इसके जवाब में ईरान ने आक्रामक रुख अपनाते हुए इजरायल पर बैलिस्टिक मिसाइलों की बौछार शुरू कर दी। युद्ध के पहले दिन ही ईरान ने लगभग 80 मिसाइलें दागीं, जिससे पूरे इजरायल में दहशत का माहौल बन गया।
दूसरे दिन करीब 60 और तीसरे दिन लगभग 30 मिसाइलें दागी गईं। इसके बाद युद्ध के अंत तक रोजाना औसतन 10 से 20 मिसाइलें छोड़ी जाती रहीं। कुल मिलाकर ईरान ने 650 से अधिक बैलिस्टिक मिसाइलों का इस्तेमाल किया, जिनमें से आधे से ज्यादा में क्लस्टर बम लगे थे। ये बम बड़े इलाके में विनाश फैलाने के लिए जाने जाते हैं, जिससे नागरिक इलाकों को भारी नुकसान पहुंचा।
