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नई दिल्ली। अमेरिका और ईरान के बीच होर्मुज स्ट्रेट को लेकर तनाव बढ़ रहा है। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जॉन बोल्टन ने चेतावनी दी है कि यदि ईरान को इस जलमार्ग पर प्रभावी नियंत्रण मिल गया तो दुनिया को लंबे समय तक आर्थिक और रणनीतिक संकट का सामना करना पड़ सकता है।

बोल्टन ने कहा कि ईरान कई वर्षों से होर्मुज स्ट्रेट को बंद करने की धमकी देता रहा है, लेकिन अब उसने वास्तव में इस रास्ते को बंद कर दिया है और ताकत के इस्तेमाल की चेतावनी दी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह केवल तेल का मुद्दा नहीं है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून और वैश्विक व्यापार की आजादी का सवाल है।

क्या है होर्मुज स्ट्रेट और क्यों है इतना महत्वपूर्ण

होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक माना जाता है। यह फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और अरब सागर से जोड़ता है। इसी रास्ते से खाड़ी देशों का अधिकांश कच्चा तेल और प्राकृतिक गैस दुनिया के विभिन्न देशों तक पहुंचता है।

विशेषज्ञों के अनुसार, वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा इसी जलमार्ग से होकर गुजरता है। सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, कुवैत, इराक और कतर जैसे देशों के तेल और गैस निर्यात के लिए यह मार्ग बेहद अहम है। यदि यहां आवाजाही बाधित होती है तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में भारी उछाल आ सकता है।

होर्मुज स्ट्रेट का भू-राजनीतिक महत्व केवल ऊर्जा आपूर्ति तक सीमित नहीं है। यह समुद्री सुरक्षा, वैश्विक व्यापार और सैन्य रणनीति का भी प्रमुख केंद्र है। अमेरिका, यूरोप और एशिया के कई देशों के लिए यह जलमार्ग आर्थिक स्थिरता से जुड़ा हुआ है।

गौरतलब हैं कि, बीते कुछ वर्षों से ईरान समय-समय पर होर्मुज स्ट्रेट को बंद करने की चेतावनी देता रहा है। ईरान का कहना रहा है कि यदि उस पर आर्थिक या सैन्य दबाव बढ़ाया गया तो वह इस समुद्री मार्ग पर नियंत्रण कड़ा कर सकता है। दूसरी ओर अमेरिका और उसके सहयोगी देशों का मानना है कि यह अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग है, जहां सभी देशों के जहाजों को स्वतंत्र रूप से आवाजाही का अधिकार होना चाहिए।

अंत में चलते चलते बता दे कि, मध्य पूर्व की मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए आने वाले समय में कूटनीतिक प्रयासों की भूमिका बेहद अहम मानी जा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि अमेरिका, ईरान और खाड़ी देशों के बीच संवाद बढ़ता है तो तनाव कम किया जा सकता है। वहीं सैन्य टकराव की स्थिति बनने पर वैश्विक ऊर्जा बाजार में बड़ा संकट पैदा हो सकता है।फिलहाल दुनिया की नजरें होर्मुज स्ट्रेट पर टिकी हुई हैं, क्योंकि यह केवल एक समुद्री मार्ग नहीं बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था, ऊर्जा सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय रणनीतिक संतुलन का महत्वपूर्ण केंद्र बन चुका है।

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