जम्मू-कश्मीर के उधमपुर जिले में सुरक्षाबलों ने एक बार फिर आतंकवाद के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई करते हुए जैश-ए-मोहम्मद के दो पाकिस्तानी मूल के आतंकियों को मार गिराया है। यह कार्रवाई बसंतगढ़ क्षेत्र के घने जंगलों में स्थित एक प्राकृतिक गुफा में छिपे आतंकियों के खिलाफ चलाए गए ऑपरेशन ‘किया’ का परिणाम थी। आतंकियों ने गुफा को अपनी अंतिम पनाह बनाया था, लेकिन वही गुफा उनकी कब्र साबित हुई। सुरक्षाबलों ने ड्रोन की मदद से उनकी लोकेशन ट्रैक की, रात भर घेराबंदी बनाए रखी और अंत में नियंत्रित विस्फोट से गुफा को उड़ा दिया। इस ऑपरेशन में कोई जवान शहीद नहीं हुआ, जबकि आतंकियों के पास से एक एम4 कार्बाइन और एक एके-47 राइफल बरामद हुई।
सुरक्षाबलों ने तुरंत इलाके की घेराबंदी मजबूत कर दी। अतिरिक्त बल तैनात किए गए ताकि आतंकियों को किसी भी हाल में भागने का मौका न मिले। शाम ढलते ही आतंकियों ने रात साढ़े सात बजे के आसपास अंधेरे का फायदा उठाकर गुफा से बाहर निकलने की कोशिश की, लेकिन जवानों की सतर्कता और त्वरित फायरिंग ने उन्हें दोबारा गुफा में वापस धकेल दिया। रात भर ड्रोन को आसमान में उड़ाया गया, जिसकी लाइव फीड से गुफा के अंदर की हर हलचल पर नजर रखी गई। बीच-बीच में गोलीबारी जारी रही, लेकिन सुरक्षाबलों ने कोई जल्दबाजी नहीं दिखाई। पूरी रात गुफा को घेरे रखा गया और आतंकियों को बाहर निकलने से रोका गया।
मिली जानकारी के अनुसार मारे गए आतंकियों में से एक जैश-ए-मोहम्मद का टॉप कमांडर रुबानी उर्फ अबू माविया (या अबू मुआविया) था, जो पाकिस्तानी मूल का था और कई वर्षों से इस क्षेत्र में सक्रिय था। वह जैश के मुखौटा संगठन ‘कश्मीर टाइगर्स’ का मोस्ट वांटेड कमांडर माना जाता था। दूसरा आतंकी जुबैर था, जो जैश के एक महत्वपूर्ण मॉड्यूल का हिस्सा था। दोनों आतंकी तीन साल पहले घुसपैठ कर कश्मीर में सक्रिय हो गए थे और विभिन्न आतंकी गतिविधियों में शामिल थे। उनकी मौत से जैश-ए-मोहम्मद के पूर्वी जम्मू में पुनरुत्थान की कोशिशों को बड़ा झटका लगा है।
बता दें कि, इस ऑपरेशन की सफलता कई कारणों से महत्वपूर्ण है। पहला, ड्रोन तकनीक का प्रभावी इस्तेमाल, जिसने गुफा के अंदर की स्थिति को स्पष्ट किया। दूसरा, रात भर की घेराबंदी और निगरानी, जिसने आतंकियों को भागने का कोई मौका नहीं दिया। तीसरा, विस्फोटक के सटीक उपयोग से गुफा को नष्ट करना, जिससे आतंकियों को जिंदा पकड़ने या भागने का कोई रास्ता नहीं बचा। सुरक्षाबलों ने इस दौरान किसी भी अनावश्यक जोखिम से बचा और नागरिकों की सुरक्षा का पूरा ध्यान रखा। इलाके में अभी भी सर्च ऑपरेशन जारी है ताकि कोई अन्य खतरा न रहे।
वही, इस घटना पर भारतीय सेना के व्हाइट नाइट कोर ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर कहा कि ऑपरेशन में अंतर-एजेंसी समन्वय, सामरिक सटीकता और उच्च पेशेवर मानकों का प्रदर्शन हुआ। क्षेत्र अब भी निगरानी में है। जम्मू-कश्मीर पुलिस और अन्य सुरक्षा एजेंसियां लगातार आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम कर रही हैं।
