नई दिल्ली ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत को पहला पदक दिलाने वाले झंडू कुमार बिहार के नालंदा जिले के रहने वाले 28 वर्षीय खिलाड़ी हैं। उन्होंने शुक्रवार को पुरुषों के हेवीवेट पैरा पावरलिफ्टिंग वर्ग में 190 किलोग्राम वजन उठाकर कांस्य पदक जीता। पांच साल की उम्र में पोलियो ने उन्हें शारीरिक रूप से कमजोर बना दिया था। परिवार की आर्थिक स्थिति साधारण थी और घर का गुजारा हरनौत बाजार में सब्जी बेचकर चलता था।
इस संबंध में बता दें कि, कोविड-19 महामारी के दौरान ओवरब्रिज निर्माण के कारण परिवार की सब्जी की दुकान बंद हो गई। ऐसे में झंडू ने परिवार की जिम्मेदारी उठाई और ई-रिक्शा चलाना शुरू कर दिया। सुबह करीब 20 किलोमीटर दूर बिहार शरीफ जाकर सब्जियां खरीदना, उन्हें बाजार में बेचना और शाम को जिम पहुंचना उनकी रोजमर्रा की जिंदगी बन गई। उनकी रोजाना कमाई 400-500 रुपये होती थी, जबकि प्रोटीन सप्लीमेंट पर करीब 1000 रुपये खर्च हो जाते थे। साल 2023 में उन्होंने राष्ट्रीय पैरा पावरलिफ्टिंग चैंपियनशिप में हिस्सा लेने के लिए अपना ई-रिक्शा बेच दिया, लेकिन वहां एक भी सफल लिफ्ट नहीं लगा सके।
चलते चलते जानकारी दे दें कि, राष्ट्रीय प्रतियोगिता के दौरान पूर्व पैरा पावरलिफ्टर और राष्ट्रीय कोच राजिंदर सिंह राहेलू की नजर उन पर पड़ी। उन्होंने झंडू को भारतीय खेल प्राधिकरण के गांधीनगर स्थित नेशनल सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में ट्रेनिंग का मौका दिया। इसके बाद उन्होंने खेलो इंडिया पैरा गेम्स में रजत पदक और एशिया-ओशिनिया ओपन पैरा पावरलिफ्टिंग चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीता।ग्लासगो में झंडू कुमार ने पहली सफल लिफ्ट 181 किलोग्राम की लगाई। इसके बाद 190 किलोग्राम वजन उठाकर कांस्य पदक पक्का कर लिया। उन्होंने 196 किलोग्राम उठाकर नया कॉमनवेल्थ रिकॉर्ड बनाने की कोशिश भी की, लेकिन वह प्रयास सफल नहीं रहा। उन्होंने कहा कि यह उनका पहला कॉमनवेल्थ गेम्स मेडल है और दिमाग में सिर्फ भारत के लिए पदक जीतने की बात चल रही थी। उन्होंने भारतीय खेल प्राधिकरण और टारगेट ओलंपिक पोडियम स्कीम का आभार भी जताया।
