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भारत के सर्वोच्च न्यायिक पद की गरिमा आज फिर एक बार नए नेतृत्व के साथ आगे बढ़ी, जब जस्टिस सूर्यकांत ने देश के 53वें मुख्य न्यायाधीश (Chief Justice of India – CJI) के रूप में शपथ ग्रहण की। राष्ट्रपति भवन के भव्य दरबार हाल में आयोजित समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने उन्हें पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई। इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल सहित कई केंद्रीय मंत्रियों और शीर्ष संवैधानिक पदाधिकारियों की उपस्थिति ने इस ऐतिहासिक क्षण को और अधिक महत्वपूर्ण बनाया।


1जानकारी दे दें कि, फरवरी 1962 क हरियाणा के हिसार में जन्में जस्टिस सूर्यकांत ने कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से मास्टर्स की डिग्री हासिल की थी। वो हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट में मुख्य न्यायाधीश रह चुके हैं।जस्टिस सूर्यकांत के न्यायिक करियर में कई ऐसे बड़े फैसले शामिल रहे हैं, जिनका सीधा प्रभाव देश की राजनीति, संविधान और जनता से जुड़े विषयों पर पड़ा है।

न्यायपालिका में सुधार के समर्थक

जस्टिस सूर्यकांत प्रशासनिक दक्षता, पारदर्शिता और न्याय को सरल बनाने के पक्षधर माने जाते हैं। वे कई बार यह स्पष्ट कर चुके हैं कि न्याय प्रक्रिया हर नागरिक के लिए सुलभ, तीव्र और विश्वसनीय होनी चाहिए। विशेषकर डिजिटल कोर्ट, नई न्यायिक तकनीकों और मामलों के लंबित होने की समस्या को खत्म करने की दिशा में उनके सुझाव अब उनके कार्यकाल में महत्वपूर्ण पहल बन सकते हैं।

वही, जस्टिस सूर्यकांत ने अपने कार्यकाल का आरंभ करते हुए न्याय की सर्वोच्चता, संविधान की मर्यादा और प्रत्येक नागरिक के अधिकारों के संरक्षण को सर्वोपरि माना है। लोकतंत्र में न्यायपालिका एक स्तंभ की तरह समाज को संतुलित रखती है और CJI का पद उस स्तंभ की नींव को मजबूत बनाए रखने का प्रतीक है।

बता दें कि, भारत आज अपने एक और महत्वपूर्ण संवैधानिक अध्याय की शुरुआत का साक्षी बना है। देश को उम्मीद है कि जस्टिस सूर्यकांत का अनुभव, न्याय दर्शन और नेतृत्व सुप्रीम कोर्ट को एक नई ऊंचाई पर ले जाएगा और न्याय सभी तक, समान रूप से और समय पर पहुँच सकेगा।

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