नई दिल्ली। जुलाई का महीना खरीफ फसलों की तैयारी के लिए उपयुक्त माना जाता है। इस समय किसान ऐसी औषधीय फसल की बुआई कर सकते हैं जिसकी मांग बाजार में लगातार बनी रहती है। खस की खेती में न तो आवारा पशु इसे नुकसान पहुंचाते हैं और न ही ज्यादा सिंचाई की जरूरत पड़ती है।
खस की खासियत यह है कि इसके पौधों में एक विशेष खुशबू होती है, जिसके कारण नीलगाय, गाय या अन्य छुट्टे जानवर इसे छूते भी नहीं हैं। यह फसल हर प्रकार की मिट्टी में आसानी से उग जाती है, चाहे बंजर जमीन हो या जलभराव वाला क्षेत्र। जुलाई में मानसून की शुरुआती बारिश पौधों को अच्छी तरह स्थापित होने में मदद करती है। एक बार पौधे बड़े हो जाने के बाद उन्हें नाममात्र के पानी की ही जरूरत होती है।
खस की असली कीमत इसकी जड़ों में होती है। रोपाई के करीब 15 से 18 महीने बाद जड़ें पूरी तरह तैयार हो जाती हैं, जिन्हें खोदकर निकाला जाता है। इन जड़ों से कीमती खस का तेल निकाला जाता है, जिसका उपयोग महंगे परफ्यूम, कॉस्मेटिक्स, साबुन और कूलिंग सिरप बनाने में किया जाता है। बाजार में इस तेल की कीमत हजारों रुपये प्रति लीटर है।इस खेती में शुरुआती पौधे खरीदने और रोपाई का ही मुख्य खर्च आता है। डेढ़ साल बाद की हार्वेस्टिंग से पारंपरिक फसलों की तुलना में कई गुना ज्यादा शुद्ध मुनाफा मिलने की संभावना होती है।
क्या है खस और क्यों बढ़ रही इसकी मांग?
खस एक सुगंधित घास है, जिसकी सबसे अधिक उपयोगी और मूल्यवान भाग इसकी जड़ें होती हैं। इन जड़ों से निकाला जाने वाला खस का आवश्यक तेल (Vetiver Oil) अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी काफी मांग वाला उत्पाद माना जाता है। इसका उपयोग महंगे परफ्यूम, कॉस्मेटिक उत्पादों, साबुन, अगरबत्ती, एयर फ्रेशनर और विभिन्न हर्बल उत्पादों के निर्माण में किया जाता है। इसके अलावा गर्मियों में बनने वाले पारंपरिक कूलिंग सिरप और सुगंधित उत्पादों में भी खस का उपयोग लंबे समय से किया जाता रहा है।
औषधीय और प्राकृतिक उत्पादों की बढ़ती मांग के कारण पिछले कुछ वर्षों में खस की व्यावसायिक खेती की ओर किसानों की रुचि बढ़ी है। यदि किसान अच्छी गुणवत्ता की खेती और उचित विपणन अपनाते हैं, तो उन्हें पारंपरिक फसलों की तुलना में बेहतर आर्थिक लाभ मिलने की संभावना रहती है।
.बां इस कड़ी मे यह बताते चले कि, बदलती जलवायु, सिंचाई की चुनौतियों और बढ़ती उत्पादन लागत के बीच खस जैसी कम लागत और उच्च मूल्य वाली फसलें किसानों के लिए नए अवसर पैदा कर रही हैं। इसकी बढ़ती औद्योगिक मांग, कम पानी की आवश्यकता, आवारा पशुओं से अपेक्षाकृत सुरक्षा और विभिन्न प्रकार की भूमि में खेती की क्षमता इसे एक आकर्षक विकल्प बनाती है।यदि वैज्ञानिक तरीकों से खेती की जाए और उत्पाद का उचित विपणन सुनिश्चित हो, तो खस की खेती किसानों की आय बढ़ाने के साथ-साथ कृषि में विविधता लाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
