नई दिल्ली। साल 2026 का दूसरा सूर्य ग्रहण आज लगने जा रहा है। यह पूर्ण सूर्य ग्रहण होगा जो कर्क राशि और शतभिषा नक्षत्र में लगेगा। भारतीय समय के अनुसार ग्रहण आज रात 9 बजकर 4 मिनट पर शुरू होगा। इसका मध्य समय रात 11 बजकर 16 मिनट रहेगा और यह रात 1 बजकर 27 मिनट पर समाप्त होगा। कुल अवधि करीब 4 घंटे 24 मिनट की होगी।
ग्रहण के दौरान रात करीब 10 बजकर 29 मिनट पर चंद्रमा सूर्य के लगभग 90 प्रतिशत हिस्से को ढक देगा। हालांकि यह नजारा भारत से दिखाई नहीं देगा। शास्त्रों के अनुसार ग्रहण का प्रभाव उन्हीं स्थानों पर माना जाता है जहां यह दिखता है, इसलिए भारत में सूतक काल लागू नहीं होगा। मंदिर बंद नहीं होंगे और खान-पान सामान्य रूप से जारी रहेगा।
यह सूर्य ग्रहण दक्षिण अफ्रीका, जिम्बाब्वे, जाम्बिया, तंजानिया, मॉरिशस, अंटार्कटिका तथा दक्षिण अमेरिका के कुछ हिस्सों जैसे अर्जेंटीना और चिली में दिखाई देगा। इन देशों में रहने वाले भारतीय स्थानीय समय के अनुसार नियम अपना सकते हैं। सूर्य ग्रहण तब होता है जब सूर्य, चंद्रमा और पृथ्वी एक सीध में आ जाते हैं तथा चंद्रमा सूर्य और पृथ्वी के बीच स्थित हो जाता है।
रात 10:29 बजे सूर्य का करीब 90 प्रतिशत हिस्सा ढकेगा
सूर्य ग्रहण के दौरान चंद्रमा पृथ्वी और सूर्य के बीच आ जाता है। जैसे-जैसे चंद्रमा सूर्य के सामने से गुजरता है, सूर्य का कुछ हिस्सा पृथ्वी से देखने पर ढका हुआ दिखाई देता है। इस ग्रहण के दौरान रात करीब 10 बजकर 29 मिनट पर चंद्रमा सूर्य के लगभग 90 प्रतिशत हिस्से को ढकने की स्थिति में होगा।
हालांकि इस घटना का अधिकतम चरण भारत से दिखाई नहीं देगा। जिन क्षेत्रों में ग्रहण दिखाई देगा, वहां रहने वाले लोगों को सूर्य को सीधे आंखों से देखने से बचना चाहिए। सूर्य ग्रहण देखने के लिए प्रमाणित सोलर फिल्टर या सुरक्षित सोलर-व्यूइंग उपकरणों का इस्तेमाल किया जाता है।
भारत में क्यों नहीं दिखेगा सूर्य ग्रहण?
किसी भी सूर्य ग्रहण की दृश्यता पृथ्वी के अलग-अलग हिस्सों में एक जैसी नहीं होती। पृथ्वी पर जहां चंद्रमा की छाया पड़ती है, वहीं से ग्रहण के किसी चरण को देखा जा सकता है। इस बार ग्रहण की दृश्यता का क्षेत्र भारत से बाहर रहेगा।
भारत में ग्रहण के समय रात होगी। इसके अलावा जिस भौगोलिक क्षेत्र से इस ग्रहण का दृश्य प्रभाव दिखाई देगा, उसमें भारत शामिल नहीं है। इसलिए देश के अधिकांश हिस्सों में लोग इसे आसमान में प्रत्यक्ष रूप से नहीं देख पाएंगे।
चूंकि 12 अगस्त 2026 का यह सूर्य ग्रहण भारत से दिखाई नहीं देगा, इसलिए यहां सामान्य दैनिक गतिविधियों पर इसका कोई प्रत्यक्ष वैज्ञानिक प्रभाव नहीं पड़ेगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भी भारत में सूतक काल लागू नहीं माना जा रहा है। ऐसे में मंदिरों के बंद होने या सामान्य खान-पान रोकने जैसी स्थिति नहीं होगी।
कुल मिलाकर 12 अगस्त 2026 का सूर्य ग्रहण वर्ष की प्रमुख खगोलीय घटनाओं में से एक है। भारतीय समय के अनुसार यह रात 9:04 बजे से 1:27 बजे तक चलेगा और इसका मध्य चरण रात 11:16 बजे रहेगा। भारत से यह ग्रहण दिखाई नहीं देगा, जबकि दक्षिणी अफ्रीका, हिंद महासागर के कुछ क्षेत्रों, अंटार्कटिका और दक्षिण अमेरिका के कुछ हिस्सों से इसे देखा जा सकेगा। भारत में इसके कारण सामान्य दिनचर्या और खान-पान जारी रहेगा, जबकि धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भी सूतक काल लागू नहीं माना जाएगा।
