नई दिल्ली भिंडी कई लोगों को खाने में पसंद आती है। अगर घर पर ही ताजी हरी भिंडी उगाई जाए तो बाजार से खरीदने की जरूरत नहीं पड़ती। किचन गार्डनिंग को मुश्किल समझने वाले लोग सही जानकारी और तरीकों से गमलों या क्यारियों में अच्छी पैदावार ले सकते हैं।भिंडी के लिए चिकनी और ज्यादा गीली मिट्टी उपयुक्त नहीं होती। भुरभुरी और उपजाऊ मिट्टी चाहिए जिसमें पानी न रुके, केवल नमी बनी रहे। मिट्टी का मिश्रण 50 प्रतिशत सामान्य बगीचे की मिट्टी, 30 प्रतिशत पुरानी गोबर की खाद या वर्मीकम्पोस्ट और 20 प्रतिशत रेत या कोकोपीट मिलाकर बनाएं। जमीन पर क्यारियां बनाई जा सकती हैं। बालकनी या छत पर कम से कम 12 से 15 इंच चौड़े और गहरे गमले या ग्रो बैग का इस्तेमाल करें। गमले के नीचे पानी निकलने का छेद जरूर होना चाहिए।
इस कड़ी में यह जानकारी दे दें कि, बीज किसी अच्छी दुकान से हाइब्रिड या देसी किस्म के लें। बोने से पहले बीजों को 12 से 14 घंटे पानी में भिगोकर रखें। फरवरी-मार्च या बरसात का मौसम भिंडी के लिए उपयुक्त है क्योंकि इसे गर्मी और हल्की उमस पसंद है। बीजों को आधा से एक इंच गहराई में दबाएं और दो बीजों के बीच चार से छह इंच की दूरी रखें। पौधों को कम से कम पांच से छह घंटे धूप मिलनी चाहिए। सिंचाई हल्की करें और मिट्टी की ऊपरी परत सूखने पर ही पानी दें। हर 15 से 20 दिन में वर्मीकम्पोस्ट या लिक्विड नीम खली दें।कीटों से बचाव के लिए नीम के तेल का छिड़काव सप्ताह में एक बार करें। बीज बोने के 50 से 60 दिन बाद भिंडी आने लगती है। उंगली जितनी लंबी और नरम भिंडी को तोड़ लें। समय पर तोड़ने से पौधे में नई शाखाएं निकलती हैं और अच्छी पैदावार मिलती है।
सही मिट्टी का चयन है सबसे महत्वपूर्ण
भिंडी की अच्छी पैदावार के लिए सबसे पहले सही मिट्टी का चयन करना जरूरी है। विशेषज्ञों के अनुसार, बहुत अधिक चिकनी या पानी रोकने वाली मिट्टी भिंडी के लिए उपयुक्त नहीं होती। ऐसी मिट्टी में पौधों की जड़ों को पर्याप्त हवा नहीं मिलती और सड़न की संभावना बढ़ जाती है।
भिंडी के लिए हल्की, भुरभुरी और उपजाऊ मिट्टी सबसे अच्छी मानी जाती है। मिट्टी में पानी का जमाव नहीं होना चाहिए, बल्कि केवल आवश्यक नमी बनी रहनी चाहिए।
गमला या ग्रो बैग कैसा होना चाहिए?
यदि आपके पास जमीन नहीं है, तो भी चिंता की बात नहीं है। भिंडी को बालकनी, छत या बरामदे में बड़े गमलों और ग्रो बैग में आसानी से उगाया जा सकता है।
विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि कम से कम 12 से 15 इंच चौड़े और उतने ही गहरे गमले का उपयोग करें। गमले या ग्रो बैग के नीचे पानी निकालने के लिए पर्याप्त छेद होना बेहद जरूरी है, ताकि अतिरिक्त पानी बाहर निकल सके और जड़ों में सड़न न हो।
यदि घर में पर्याप्त जगह है, तो जमीन पर छोटी-छोटी क्यारियां बनाकर भी भिंडी की खेती की जा सकती है।
आज के समय में किचन गार्डन केवल शौक नहीं बल्कि स्वस्थ जीवनशैली का हिस्सा बनता जा रहा है। यदि सही मिट्टी, गुणवत्तापूर्ण बीज, पर्याप्त धूप, संतुलित सिंचाई और नियमित जैविक खाद का उपयोग किया जाए, तो घर की छत, बालकनी या छोटे से आंगन में भी ताजी और पौष्टिक भिंडी की भरपूर पैदावार प्राप्त की जा सकती है। इससे न केवल ताजी सब्जियां मिलती हैं, बल्कि घर का खर्च भी कुछ हद तक कम होता है और रसायन-मुक्त भोजन का लाभ भी मिलता है।
