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नई दिल्ली।घर की छत, बालकनी या छोटे प्लॉट पर बनाए गए किचन गार्डन में सब्जियों और पौधों की अच्छी ग्रोथ के लिए खाद महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। हालांकि, कई लोग यह गलती करते हैं कि ज्यादा खाद डालने से पौधे तेजी से बढ़ेंगे, जबकि वास्तव में इससे उलटा प्रभाव पड़ सकता है।

कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, किचन गार्डन में ऑर्गेनिक खाद सबसे सुरक्षित विकल्प है। कम्पोस्ट, वर्मी कम्पोस्ट या सड़ी हुई गोबर की खाद मिट्टी को धीरे-धीरे पोषण देती है और लंबे समय तक फायदा पहुंचाती है। आमतौर पर हर 15 से 30 दिन के अंतराल पर हल्की मात्रा में खाद देना पर्याप्त होता है, जो पौधों के प्रकार और मौसम पर निर्भर करता है। पत्तेदार सब्जियों को ज्यादा नाइट्रोजन की जरूरत होती है, जबकि फल वाली सब्जियों जैसे टमाटर, मिर्च और बैंगन को संतुलित नाइट्रोजन, फॉस्फोरस और पोटाश की आवश्यकता है।

चलते चलते बताते चले कि, ज्यादा फर्टिलाइजर डालने से मिट्टी में लवण जमा हो जाते हैं, जिससे मिट्टी की प्राकृतिक संरचना बिगड़ जाती है। इससे पौधों की जड़ों को पानी और पोषक तत्व ठीक से नहीं मिल पाते। पत्तियां जलने, सूखने या पीली पड़ने लगती हैं तथा फूल और फल कम लगते हैं। ओवर फर्टिलाइजेशन से जड़ें बर्न हो सकती हैं और पौधे की ग्रोथ रुक सकती है।विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि खाद डालने से पहले मिट्टी की जांच करानी चाहिए। इससे पता चलता है कि मिट्टी में कौन से पोषक तत्व कम या ज्यादा हैं। मौसम के अनुसार भी खाद की मात्रा बदलनी चाहिए। गर्मियों में हल्की फीडिंग और बारिश में कम अतिरिक्त खाद की जरूरत होती है।

ऑर्गेनिक खाद सबसे बेहतर विकल्प

विशेषज्ञों के अनुसार, किचन गार्डन के लिए ऑर्गेनिक खाद सबसे सुरक्षित और प्रभावी विकल्प मानी जाती है। कम्पोस्ट, वर्मी कम्पोस्ट, पत्तियों से बनी खाद और अच्छी तरह सड़ी हुई गोबर की खाद मिट्टी की गुणवत्ता सुधारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। ये खादें धीरे-धीरे पोषक तत्व छोड़ती हैं, जिससे पौधों को लंबे समय तक पोषण मिलता रहता है।

जानकारी देते चले कि, रासायनिक उर्वरकों की तुलना में ऑर्गेनिक खाद मिट्टी की जैविक सक्रियता को बढ़ाती है और उसमें मौजूद लाभकारी सूक्ष्मजीवों को संरक्षित रखने में मदद करती है। इससे मिट्टी की जलधारण क्षमता भी बढ़ती है और पौधों की जड़ें बेहतर तरीके से विकसित होती हैं।

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