नई दिल्ली।आज के समय में किसानों के लिए फसल उगाने से भी बड़ी चुनौती उसे सही दाम पर बेचना है। अक्सर सही स्टोरेज की सुविधा न होने पर किसानों को अपनी उपज औने-पौने दामों में बेचनी पड़ती है। इसी समस्या को दूर करने के लिए नेशनल हॉर्टिकल्चर बोर्ड खेत पर कोल्ड स्टोरेज लगाने के लिए सब्सिडी दे रहा है।अगर किसान अपने खेत या जमीन पर कोल्ड स्टोरेज यूनिट शुरू करते हैं तो सरकार कुल प्रोजेक्ट कॉस्ट पर आर्थिक मदद देती है। सामान्य मैदानी इलाकों में 35 फीसदी तक सब्सिडी मिलती है। वहीं पूर्वोत्तर राज्यों, पहाड़ी इलाकों और दुर्गम क्षेत्रों में 50 फीसदी तक की वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है।इस योजना का मकसद फल, सब्जी और अन्य बागवानी फसलों को सड़ने से बचाना है। कोल्ड स्टोरेज बनने से किसान अपनी फसल को तुरंत बेचने के बजाय सही समय आने तक सुरक्षित रख सकते हैं। जब बाजार में मांग बढ़ती है और दाम अच्छे मिलते हैं तब किसान अपनी उपज बेचकर कमाई बढ़ा सकते हैं।
इस सब्सिडी का लाभ किसान, किसान उत्पादक संगठन यानी एफपीओ, स्वयं सहायता समूह, सहकारी समितियां और प्राइवेट एग्रो-कंपनियां भी उठा सकते हैं। सरकार द्वारा तय गाइडलाइन्स के अनुसार कोल्ड स्टोरेज की कैपेसिटी और तकनीक के आधार पर प्रोजेक्ट की लागत तय की जाती है। साधारण कोल्ड स्टोरेज से लेकर आधुनिक सीए यानी Controlled Atmosphere स्टोरेज तक के लिए अलग-अलग मानक हैं।कोल्ड स्टोरेज यूनिट लगाने के लिए आवेदन नेशनल हॉर्टिकल्चर बोर्ड के ऑफिशियल ऑनलाइन पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन करके किया जाता है। आवेदन के दौरान जमीन के कानूनी दस्तावेज, प्रोजेक्ट की डीपीआर, आधार कार्ड, पैन कार्ड और बैंक पासबुक की कॉपी जमा करनी होती है। अगर बैंक से लोन लिया जा रहा है तो इन-प्रिंसिपल अप्रूवल लेटर भी सबमिट करना जरूरी है। फॉर्म सबमिट होने के बाद अधिकारियों द्वारा जांच के बाद अप्रूवल मिलने पर सब्सिडी का पैसा अलग-अलग स्टेज में सीधे आवेदक के बैंक अकाउंट में क्रेडिट कर दिया जाता है।
कितनी मिलती है सब्सिडी?
योजना के तहत यदि कोई पात्र किसान या संस्था अपने खेत या भूमि पर कोल्ड स्टोरेज यूनिट स्थापित करती है, तो परियोजना लागत के आधार पर सब्सिडी दी जाती है।
- सामान्य मैदानी क्षेत्रों में परियोजना लागत का 35 प्रतिशत तक अनुदान दिया जाता है।
- पूर्वोत्तर राज्यों, पहाड़ी क्षेत्रों और अन्य दुर्गम इलाकों में यह सहायता 50 प्रतिशत तक हो सकती है।
सब्सिडी की वास्तविक राशि परियोजना की स्वीकृत लागत, क्षमता और लागू दिशा-निर्देशों के अनुसार निर्धारित की जाती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि कृषि क्षेत्र में आधुनिक भंडारण और कोल्ड चेन अवसंरचना का विकास किसानों की आय बढ़ाने, खाद्य अपव्यय कम करने और बागवानी क्षेत्र को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। हालांकि योजना का लाभ लेने से पहले पात्रता, दिशा-निर्देश और आवेदन प्रक्रिया की जानकारी आधिकारिक स्रोतों से अवश्य जांच लेनी चाहिए।
