नई दिल्ली अक्सर घरों में चावल धोने या पकाने के बाद बचा पानी फेंक दिया जाता है। लेकिन यही चावल का पानी किचन गार्डन और घर के पौधों के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है। इसमें मौजूद प्राकृतिक पोषक तत्व पौधों की ग्रोथ को बेहतर बनाने के साथ-साथ मिट्टी की क्वालिटी बढ़ाने में भी मदद करते हैं। खासकर अगर प्लांट की बढ़त रुक गई है या पौधे कमजोर दिखाई दे रहे हैं, तो यह आसान घरेलू उपाय काम आ सकता है।
जानकारी देते चले कि, चावल के पानी में कार्बोहाइड्रेट, विटामिन बी, आयरन, जिंक और मैग्नीशियम जैसे कई पोषक तत्व पाए जाते हैं। ये तत्व पौधों को जरूरी पोषण देने के साथ मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने में मदद करते हैं। इसे पौधों के लिए एक प्राकृतिक लिक्विड फर्टिलाइजर माना जाता है। चावल धोते समय निकलने वाले पहले पानी को एक बर्तन में इकट्ठा करें। इस पानी को करीब 7 दिनों तक सुरक्षित रखें, जिससे इसमें अच्छी तरह फर्मेंटेशन हो सके और पोषक तत्व पूरी तरह घुल जाएं। इसके बाद इस फर्मेंटेड पानी में 5 गुना साफ पानी मिलाकर पतला कर लें। अब यह प्राकृतिक लिक्विड फर्टिलाइजर बन जाएगा।
इस संबंध में बता दें कि, इस पावर बूस्टर को सीधे पौधों की मिट्टी में डाल सकते हैं। चाहें तो स्प्रे बोतल में भरकर पत्तियों पर भी छिड़क सकते हैं। इससे पौधों को पोषण मिलने के साथ-साथ कीड़ों की समस्या कम करने में भी मदद मिल सकती है। रसोई से निकलने वाला जैविक कचरा भी गार्डनिंग में उपयोगी होता है। सब्जियों और फलों के छिलके, इस्तेमाल की हुई चायपत्ती और अंडों के छिलकों से घर पर ऑर्गेनिक खाद तैयार की जा सकती है। इसे जीरो-वेस्ट गार्डनिंग कहा जाता है।
आखिर में बता दें कि, कंपोस्ट बनाने के लिए किसी बाल्टी या गमले में सबसे नीचे सूखी पत्तियां या थोड़ी मिट्टी डालें। इसके ऊपर रसोई से निकला जैविक कचरा रखें और इसी प्रक्रिया को बार-बार दोहराते रहें। कुछ हफ्तों बाद यही कचरा सड़कर प्राकृतिक खाद में बदल जाएगा। नींबू, संतरा और मौसमी जैसे खट्टे फलों के छिलकों को पानी और थोड़ा गुड़ मिलाकर प्लास्टिक की बोतल में करीब 3 महीने तक बंद रखें। तैयार लिक्विड को पानी में मिलाकर पौधों पर स्प्रे किया जा सकता है। चावल और दाल धोने के बाद बचा पानी भी पौधों में इस्तेमाल किया जा सकता है, जिसमें स्टार्च और कई मिनरल्स मौजूद होते हैं।
