नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में जारी जंग और बढ़ती कीमतों के बीच पुणे गैस ने केंद्र सरकार से भारत में एलपीजी दक्षता नीति बनाने की मांग की है। कंपनी ने पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय को एक प्रस्ताव सौंपा है।
पुणे गैस ने कहा कि कमर्शियल सिलिंडर की कीमत साल की शुरुआत में 1884 रुपये थी, जो अब बढ़कर 3100 रुपये हो गई है। इससे रेस्तरां, अस्पताल और अन्य सेक्टर्स पर असर पड़ा है। कंपनी का तर्क है कि देश की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए एलपीजी के कुशल इस्तेमाल की क्षमता बढ़ानी जरूरी है।
प्रस्ताव में एलपीजी की बर्बादी रोकने, मानकीकरण करने और कमर्शियल व इंडस्ट्रियल प्रतिष्ठानों में बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करने पर जोर दिया गया है। इसमें इंडस्ट्री में 47.5 किलोग्राम वाले LOT सिलिंडर को बढ़ावा देने, चोरी रोकने और सप्लाई के बेहतर उपयोग की बात कही गई है। सरकार से कुशल एलपीजी सिस्टम अपनाने के लिए पॉलिसी इंसेंटिव देने का भी सुझाव दिया गया है।पुणे गैस ने स्वदेशी LPG मैनेजमेंट सिस्टम ‘LPGenius’ का भी जिक्र किया। कंपनी पेट्रोलियम मंत्रालय और तेल मार्केटिंग कंपनियों के साथ मिलकर फील्ड डेटा जुटाने तथा केस स्टडीज में सहयोग करने को तैयार है।
बढ़ती कीमतों ने बढ़ाई चिंता
पुणे गैस का कहना है कि कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में हाल के महीनों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। कंपनी के अनुसार, वर्ष की शुरुआत में जहां 19 किलोग्राम कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमत लगभग 1,884 रुपये थी, वहीं अब यह बढ़कर 3,100 रुपये तक पहुंच गई है। इस बढ़ोतरी का सीधा असर उन क्षेत्रों पर पड़ रहा है जो बड़े पैमाने पर एलपीजी का उपयोग करते हैं।
रेस्तरां, होटल, अस्पताल, कैटरिंग सेवाएं, फूड प्रोसेसिंग यूनिट्स और अन्य औद्योगिक प्रतिष्ठानों के लिए ईंधन लागत में यह वृद्धि संचालन खर्च बढ़ाने वाली साबित हो रही है। कई छोटे और मध्यम व्यवसायों के लिए बढ़ती ईंधन लागत लाभप्रदता को प्रभावित कर सकती है।
एलपीजी की बर्बादी रोकने पर जोर
पुणे गैस द्वारा प्रस्तुत प्रस्ताव में एलपीजी की बर्बादी रोकने के लिए कई सुझाव दिए गए हैं। इनमें प्रमुख रूप से गैस वितरण प्रणाली का मानकीकरण, बेहतर पाइपलाइन और स्टोरेज इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करना तथा आधुनिक निगरानी प्रणाली अपनाना शामिल है।
कंपनी का कहना है कि कई व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में तकनीकी कमियों, पुराने उपकरणों और अनुचित गैस प्रबंधन के कारण आवश्यकता से अधिक एलपीजी की खपत होती है। यदि इन कमियों को दूर किया जाए तो बड़े स्तर पर ईंधन की बचत संभव है।
ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ती वैश्विक ऊर्जा चुनौतियों के बीच ईंधन की उपलब्धता के साथ-साथ उसकी दक्षता पर भी ध्यान देना भविष्य की ऊर्जा रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बन सकता है। यदि इस दिशा में उद्योग, सरकार और तकनीकी कंपनियां मिलकर काम करती हैं, तो इससे भारत की ऊर्जा व्यवस्था को अधिक टिकाऊ और कुशल बनाने में मदद मिल सकती है।
