नई दिल्ली। एलपीजी गैस सिलेंडर की किल्लत को लेकर आ रही खबरों के बाद केंद्र सरकार सक्रिय हो गई है। मिडिल ईस्ट संकट के बीच घरेलू उपभोक्ताओं को प्राथमिकता देते हुए सरकार ने कालाबाजारी और जमाखोरी रोकने के लिए आवश्यक वस्तु अधिनियम (एस्मा) लागू कर दिया है। सरकार ने आम उपभोक्ताओं से अपील की है कि वे घबराएं नहीं, क्योंकि सभी के लिए पर्याप्त गैस आपूर्ति सुनिश्चित करने के ठोस इंतजाम किए गए हैं। कमर्शियल गैस सिलेंडरों की आपूर्ति सुचारू बनाए रखने के लिए होटल-रेस्तरां एसोसिएशन सहित अन्य पक्षों से बातचीत की जा रही है।
सरकार ने घरेलू एलपीजी आपूर्ति सुगम बनाने के लिए छह बड़े कदम उठाए हैं। पहले कदम के तहत रिफाइनरी और पेट्रोकेमिकल इकाइयों को घरेलू रसोई गैस की निर्बाध आपूर्ति का निर्देश दिया गया है। दूसरे में सरकारी और निजी क्षेत्र की रिफाइनरियों को एलपीजी उत्पादन अधिकतम करने का आदेश जारी किया गया है। तीसरे कदम में जमाखोरी और पैनिक बुकिंग रोकने के लिए सिलेंडर बुकिंग का अंतर 21 दिनों से बढ़ाकर 25 दिन कर दिया गया है। चौथे में घरेलू पाइप वाली प्राकृतिक गैस (पीएनजी), वाहनों के लिए सीएनजी और घरेलू एलपीजी को प्राथमिकता दी गई है। पांचवें कदम के तहत रेस्तरां-होटल में कमर्शियल सिलेंडर की कमी को देखते हुए ओएमसी की एक विशेष समिति गठित की गई है। छठे कदम में अतिरिक्त उत्पादित एलपीजी को केवल तीन सरकारी कंपनियों आईओसीएल, बीपीसीएल और एचपीसीएल को ही बेचने का प्रावधान किया गया है।
कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की अचानक किल्लत से होटल और रेस्तरां उद्योग में चिंता बढ़ गई है, खासकर बेंगलुरु जैसे शहरों में। पेट्रोलियम मंत्रालय ने आपूर्ति संबंधी समस्याओं के लिए एक समिति बनाई है, जो शिकायतों की समीक्षा करेगी और वास्तविक जरूरतों के अनुसार गैस मुहैया कराएगी। मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि आपूर्ति में कोई दिक्कत नहीं है और परिवारों की सभी जरूरतें पूरी की जा रही हैं। इंडस्ट्री और कमर्शियल उपभोक्ताओं के लिए सप्लाई सीमित है, लेकिन समिति इसकी निगरानी कर रही है। गैर-घरेलू एलपीजी आयात पर निर्भर होने के कारण सभी शिकायतों का समाधान संभव नहीं हो सकता, इसलिए प्राथमिकता के आधार पर कार्रवाई की जा रही है। अस्पतालों और स्कूलों को भी एलपीजी उपलब्ध कराने का फैसला लिया गया है। इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम जैसी कंपनियां इस मामले में सक्रिय हैं।
