कोलकाता, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने तुष्टीकरण के आरोपों पर करारा पलटवार किया है। उन्होंने कहा कि वे सभी धर्मों का सम्मान करती हैं और मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारा तथा गिरजाघर सभी जगह जाती हैं, फिर उनके रोज़े (रामजान) पर जाने पर ही आपत्ति क्यों जताई जाती है? यह बयान उन्होंने सोमवार को न्यूटाउन में ‘दुर्गा आंगन’ नामक विशाल दुर्गा मंदिर परिसर के शिलान्यास समारोह के दौरान दिया। इस मौके पर उन्होंने बंगाल की सांस्कृतिक विरासत को मजबूत करने और पर्यटन को बढ़ावा देने की दिशा में कई बड़ी घोषणाएं भी कीं।
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने समारोह को संबोधित करते हुए कहा, “मैं सभी धर्मों का सम्मान करती हूं। मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारा और गिरजाघर, सभी जगह जाती हूं। फिर मेरे रोज़े पर जाने पर ही सवाल क्यों उठाए जाते हैं? कुछ लोग केवल चुनाव के समय धर्म को याद करते हैं, जबकि हमारी सरकार ने हमेशा आस्था का सम्मान किया है।”
दुर्गा आंगन परियोजना को लेकर मुख्यमंत्री ने विस्तार से जानकारी दी। यह विश्व का सबसे बड़ा दुर्गा मंदिर होगा, जो 17.28 एकड़ भूमि पर बनाया जाएगा। परिसर में एक साथ एक लाख लोग बैठ सकेंगे। कुल 1,008 स्तंभ होंगे, जबकि मुख्य गर्भगृह की ऊंचाई 54 मीटर होगी। यहां 108 देवी-देवताओं की मूर्तियां और 64 सिंहों की मूर्तियां लगाई जाएंगी। गणेश, लक्ष्मी, कार्तिकेय और सरस्वती के अलग-अलग मंदिर भी बनेंगे। इसके अलावा सांस्कृतिक संग्रहालय भी होगा, जहां दुर्गा पूजा की परंपराओं को प्रदर्शित किया जाएगा। इस परियोजना पर कुल 262 करोड़ रुपये खर्च होंगे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह परियोजना न केवल धार्मिक, बल्कि सांस्कृतिक और आर्थिक महत्व की है। इससे पर्यटन बढ़ेगा और रोजगार के अवसर पैदा होंगे। उन्होंने बताया कि 2025 में पश्चिम बंगाल देश में विदेशी पर्यटकों के आने के मामले में दूसरे स्थान पर है और 2026 में पहले स्थान पर पहुंच जाएगा। इस साल अक्टूबर तक 24 करोड़ 24 लाख पर्यटक बंगाल आए। दुर्गा पूजा के दौरान व्यापार 70-80 हजार करोड़ रुपये का होता है।
बता दें कि, यह घटना राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि 2026 के विधानसभा चुनाव नजदीक हैं। भाजपा ने दुर्गा आंगन को तुष्टीकरण और चुनावी नाटक करार दिया है, जबकि ममता ने इसे सेक्युलरिज्म और सांस्कृतिक संरक्षण का प्रमाण बताया है।दुर्गा आंगन और अन्य परियोजनाएं बंगाल की धार्मिक सद्भाव और विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं। मुख्यमंत्री का यह बयान एक बार फिर साबित करता है कि वे सभी धर्मों के प्रति समान सम्मान रखती हैं और राजनीति में धर्म का इस्तेमाल नहीं होने देना चाहतीं।
