कोलकाता। पश्चिम बंगाल में आगामी विधानसभा चुनाव 2026 की तैयारियां जोरों पर हैं। चुनाव आयोग ने मतदान तारीखों के ऐलान और आदर्श आचार संहिता लागू होने से पहले ही राज्य में बड़े पैमाने पर सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने का फैसला लिया है। चुनाव आयोग ने राज्य पुलिस और प्रशासन को संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान जल्द से जल्द पूरी करने का निर्देश दिया है, ताकि केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (सीएपीएफ) की तैनाती प्रभावी ढंग से की जा सके। इस कदम से राज्य में चुनावी प्रक्रिया को निष्पक्ष, शांतिपूर्ण और विश्वसनीय बनाने का संदेश स्पष्ट है।
यहां हमआपको बता दें कि, चुनाव आयोग ने राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) कार्यालय के माध्यम से बंगाल पुलिस को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान की प्रक्रिया को प्राथमिकता दी जाए। यदि संभव हो तो मार्च के दूसरे सप्ताह तक यह कार्य पूरा कर लिया जाए। संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान चुनावी हिंसा, प्रभाव क्षेत्र, पूर्व में हुई घटनाओं और अन्य कारकों के आधार पर की जाती है। इन क्षेत्रों में मतदान केंद्रों की सुरक्षा, मतदाताओं की स्वतंत्रता और चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए विशेष ध्यान दिया जाता है। चुनाव आयोग ने जोर दिया है कि केंद्रीय पर्यवेक्षकों की सलाह से ही इन क्षेत्रों की संवेदनशीलता का आकलन किया जाए और उसके आधार पर बलों की तैनाती की योजना तैयार की जाए।
जानकारी के लिए बता दें कि, पहले चरण में लगभग 110 सीआरपीएफ, 55 बीएसएफ, 27 आईटीबीपी, 27 एसएसबी और 21 सीआईएसएफ कंपनियां शामिल होंगी। दूसरे चरण में 120 सीआरपीएफ, 65 बीएसएफ, 20 आईटीबीपी, 19 एसएसबी और 16 सीआईएसएफ कंपनियां तैनात की जाएंगी। प्रत्येक कंपनी में कम से कम 72 जवान होते हैं, जिससे कुल मिलाकर हजारों सुरक्षाकर्मी राज्य में मौजूद रहेंगे। यह तैनाती क्षेत्र नियंत्रण (एरिया डोमिनेशन), मतदाताओं में विश्वास जगाने (कॉन्फिडेंस बिल्डिंग मेजर्स), मतदान दिवस की ड्यूटी, ईवीएम और स्ट्रॉन्ग रूम की सुरक्षा तथा मतगणना केंद्रों की व्यवस्था के लिए की जा रही है।
अंत मेंं बता दें कि, चुनाव आयोग ने राज्य प्रशासन को भी निर्देश दिए हैं कि पुलिसकर्मियों की रैंडमाइजेशन (यादृच्छिक तैनाती) केंद्रीय पर्यवेक्षकों की उपस्थिति में हो। इससे प्रक्रिया में पारदर्शिता आएगी। कुल मिलाकर, चुनाव आयोग की ये तैयारियां दर्शाती हैं कि 2026 का विधानसभा चुनाव निष्पक्ष और शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न होगा। राज्य के मतदाताओं को स्वतंत्र रूप से मतदान करने का अवसर मिलेगा और लोकतंत्र की मजबूती सुनिश्चित होगी।
