नई दिल्ली।धान के सीजन की शुरुआत होते ही किसानों के लिए नर्सरी तैयार करना सबसे पहला और जरूरी काम होता है। मजबूत और स्वस्थ नर्सरी होने पर ही आगे चलकर धान की अच्छी पैदावार मिल सकती है। कई किसान शुरुआती चरण में छोटी-छोटी गलतियां कर देते हैं, जिनका असर पूरी फसल पर पड़ सकता है।
इस कड़ी में हम आपको बता दें कि, धान की नर्सरी डालते समय सबसे महत्वपूर्ण है सही समय का चुनाव। आमतौर पर मई के आखिरी हफ्ते से जून के बीच का समय बिचड़ा तैयार करने के लिए सबसे उपयुक्त माना जाता है। इस दौरान सही तापमान के कारण बीज अच्छी तरह अंकुरित होते हैं।अलग-अलग किस्मों के अनुसार बीज की मात्रा तय करना जरूरी है। बासमती जैसी बारीक या सुगंधित किस्मों की खेती के लिए एक एकड़ की रोपाई हेतु लगभग 15 से 20 किलोग्राम बीज की जरूरत होती है। इस हिसाब को ध्यान में रखकर ही नर्सरी की तैयारी करनी चाहिए।
नर्सरी के लिए खेत की तैयारी कैसे करें?
नर्सरी के लिए ऐसी जमीन चुननी चाहिए जहां पानी की निकासी अच्छी हो और सिंचाई की सुविधा उपलब्ध हो। खेत की 2 से 3 बार अच्छी तरह जुताई करके मिट्टी को भुरभुरा बना लेना चाहिए।
इसके बाद खेत को समतल कर छोटे-छोटे बेड तैयार किए जाते हैं। समतल खेत में पानी समान रूप से फैलता है, जिससे अंकुरण बेहतर होता है। खेत में गोबर की सड़ी हुई खाद डालने से मिट्टी की उर्वरता बढ़ती है और पौधों को शुरुआती पोषण मिलता है।
इस संबंध में कृषि वैज्ञानिकों का मानना है कि अच्छी नर्सरी धान की सफल खेती की नींव होती है। यदि किसान सही समय पर नर्सरी तैयार करें, संतुलित बीज मात्रा का उपयोग करें और पानी तथा उर्वरक का सही प्रबंधन करें तो फसल की गुणवत्ता और उत्पादन दोनों बेहतर हो सकते हैं।
अंत मे यह जानना आवश्धायक हैं कि, धान की खेती में बढ़ती लागत को देखते हुए वैज्ञानिक तरीके अपनाना समय की जरूरत बन गया है। आधुनिक तकनीक और कृषि विशेषज्ञों की सलाह के अनुसार काम करने से किसान कम लागत में बेहतर उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं। खासकर बासमती और हाइब्रिड धान की खेती करने वाले किसानों के लिए नर्सरी प्रबंधन पर विशेष ध्यान देना बेहद जरूरी है।
