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कोलकाता। राष्ट्रीय मतदाता दिवस के अवसर पर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की प्रमुख ममता बनर्जी ने भारत निर्वाचन आयोग (ईसी) पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के इशारे पर काम कर रहा है और विपक्ष को दबाने की कोशिश कर रहा है। ममता बनर्जी के इस बयान ने एक बार फिर देश की राजनीति में चुनावी प्रक्रिया, लोकतंत्र की मजबूती और संवैधानिक संस्थाओं की स्वतंत्रता को लेकर बहस को तेज कर दिया है।


हम आपको बता दें कि, रविवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करके ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग पर निशाना साधा। उन्होंने पोस्ट में लिखा कि चुनाव आयोग ‘ भाजपा, अपने आका के इशारे पर, विपक्ष को कुचलने और भारतीय लोकतंत्र की नींव को नष्ट करने में लगे हैं, और फिर भी उनमें मतदाता दिवस मनाने की हिम्मत है।’

चुनाव आयोग की भूमिका पर सवाल

भारत निर्वाचन आयोग एक संवैधानिक संस्था है, जिसका मुख्य उद्देश्य देश में स्वतंत्र, निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव सुनिश्चित करना है। आयोग की निष्पक्षता और स्वतंत्रता लोकतंत्र की मजबूती की बुनियाद मानी जाती है। हालांकि, पिछले कुछ वर्षों में विभिन्न राजनीतिक दलों द्वारा आयोग के फैसलों पर सवाल उठाए जाते रहे हैं। ममता बनर्जी का आरोप इसी व्यापक बहस का हिस्सा है, जिसमें विपक्षी दल यह दावा करते रहे हैं कि चुनावी फैसलों में सत्तारूढ़ दल को लाभ पहुंचाया जा रहा है।

जानकारी दे दें कि, राष्ट्रीय मतदाता दिवस के मौके पर ममता बनर्जी द्वारा चुनाव आयोग पर लगाए गए आरोपों ने एक बार फिर देश में लोकतंत्र, चुनावी निष्पक्षता और संवैधानिक संस्थाओं की स्वतंत्रता को लेकर बहस को केंद्र में ला दिया है। यह स्पष्ट है कि आने वाले समय में जैसे-जैसे चुनाव नजदीक आएंगे, इस तरह के राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप और तेज होंगे। ऐसे में मतदाताओं, संस्थाओं और राजनीतिक दलों की जिम्मेदारी बनती है कि वे लोकतांत्रिक मूल्यों को सर्वोपरि रखें और स्वस्थ राजनीतिक संवाद को बढ़ावा दें।

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