गाजियाबाद। मध्य पूर्व में जारी भू-राजनीतिक तनाव का असर अब भारत की रसोई और रोज़मर्रा की ज़िंदगी पर साफ दिखाई देने लगा है। अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच चल रहे संघर्ष ने ऊर्जा आपूर्ति शृंखला को प्रभावित किया है, जिससे देश में एलपीजी संकट गहरा गया है। इसका सीधा असर आम उपभोक्ताओं और छोटे कारोबारियों की जेब पर पड़ रहा है। गैस की बढ़ती कीमतों, आपूर्ति में देरी और कमर्शियल सिलेंडरों की कमी ने बाजार की रफ्तार को धीमा कर दिया है।
ऊर्जा विशेषज्ञों के अनुसार, भारत अपनी एलपीजी जरूरत का 60 प्रतिशत से अधिक आयात करता है। आयात का बड़ा हिस्सा रणनीतिक समुद्री मार्ग Strait of Hormuz से होकर आता है। मौजूदा सैन्य तनाव के कारण इस मार्ग पर आवाजाही बाधित हुई है, जिससे आपूर्ति प्रभावित हुई और कीमतों में तेजी आई। वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल और गैस की ढुलाई प्रभावित होने से ऊर्जा बाजार में अस्थिरता बढ़ी है, जिसका असर भारत जैसे आयात-निर्भर देशों पर अधिक पड़ रहा है।
दूसरी ओर, गाजियाबाद में सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा के लिए पैसिव यूथेनेशिया (निष्क्रिय इच्छामृत्यु) को मंजूरी दे दी है। 31 वर्षीय हरीश पिछले 13 वर्षों से कोमा में हैं और बिस्तर पर पड़े हुए हैं। उनके पिता अशोक राणा ने रोते हुए कहा कि उनका बेटा कभी इंजीनियरिंग कॉलेज में टॉपर था, लेकिन 20 अगस्त 2013 को हुए हादसे ने उसे इस हाल में पहुंचा दिया। अब ठीक होने की कोई उम्मीद नहीं बची है।अशोक राणा ने फैसले पर आभार जताया और कहा कि यह उनके परिवार के लिए कठिन निर्णय था, लेकिन वे बेटे को दर्द से मुक्ति दिलाना चाहते हैं। हरीश को एम्स ले जाया जाएगा, जहां डॉक्टरों की निगरानी में फूड पाइप हटाया जाएगा। परिवार राज नगर एक्सटेंशन में रहता है और हरीश सबसे बड़े बेटे हैं। पिता ने बताया कि पूरा परिवार लंबे समय से उनकी सेवा कर रहा है, लेकिन अब दर्दनाक जीवन से छुटकारा जरूरी है।
