नई दिल्ली। देश के कई हिस्सों में मानसूनी बारिश की कमी ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। खरीफ फसलों की बुआई का समय आ चुका है, लेकिन बारिश न होने से कई राज्यों में बुआई प्रभावित हो रही है। सरकार ने किसानों को निराश न होने की सलाह दी है और स्पष्ट किया है कि बारिश की कमी के बावजूद वे बुआई की तैयारी तेज करें। इस संकट में सिंचाई का अतिरिक्त खर्च सरकार उठाने जा रही है। केंद्र और राज्य सरकारों ने मिलकर आपातकालीन कार्ययोजना तैयार की है।
इस संबंध में सरकार ने कहा है कि खेतों को सूखा नहीं छोड़ा जाएगा। जिन क्षेत्रों में बारिश सामान्य से कम हुई है, वहां सिंचाई के वैकल्पिक इंतजामों के लिए आर्थिक मदद दी जा रही है। बिहार, उत्तर प्रदेश और झारखंड जैसे राज्यों में मानसून की देरी को देखते हुए विशेष डीजल अनुदान योजना की घोषणा की जा रही है। इसके तहत किसानों को पंप सेट चलाकर सिंचाई के लिए प्रति लीटर डीजल पर भारी सब्सिडी दी जाएगी।
मानसून की कमी से बढ़ी किसानों की चिंता
भारत की कृषि का बड़ा हिस्सा अब भी मानसून पर निर्भर है। धान, मक्का, सोयाबीन, कपास, दलहन और तिलहन जैसी खरीफ फसलों की बुआई समय पर वर्षा होने पर ही बेहतर मानी जाती है। हालांकि इस वर्ष कई इलाकों में बारिश की कमी के कारण खेतों में पर्याप्त नमी नहीं बन पाई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि शुरुआती चरण में बारिश कम हो तो समय पर सिंचाई करके फसलों को सुरक्षित रखा जा सकता है। यही कारण है कि सरकार किसानों को बुआई टालने के बजाय वैकल्पिक सिंचाई साधनों का उपयोग करने की सलाह दे रही है।
यहां अंत में जानकारी देते चले कि, प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के तहत ‘पर ड्रॉप मोर क्रॉप’ अभियान को तेज किया जा रहा है। ड्रिप और स्प्रिंकलर प्रणालियों को अपनाने के लिए छोटे और सीमांत किसानों को 80 से 90 प्रतिशत तक का अनुदान दिया जा रहा है। धान जैसी पानी वाली फसलों की जगह किसान बाजरा, ज्वार और रागी जैसी कम पानी वाली फसलें लगा सकते हैं। धान के लिए कम दिनों वाली किस्में और डीएसआर (सीधी बुआई) तकनीक का उपयोग करने की सलाह दी गई है, जिसमें पानी की 20 से 30 प्रतिशत बचत होती है।
