नई दिल्ली।मध्य प्रदेश में सामान्य से कम बारिश के कारण खरीफ सीजन की खेती को लेकर किसानों की चिंता बढ़ गई है। ऐसे में कृषि विशेषज्ञ कम पानी में बेहतर उत्पादन देने वाली मूंग की खेती अपनाने की सलाह दे रहे हैं। प्रगतिशील किसान शिवेंद्र सिंह के अनुसार मूंग की फसल 65 से 70 दिनों में तैयार हो जाती है और इसमें सिंचाई की जरूरत भी कम पड़ती है।खेत में जलभराव से बचाव जरूरी है, क्योंकि इससे फसल को नुकसान होता है। मानसून के लिए पंत मूंग-5, पूसा विशाल और मेहा किस्में उपयुक्त मानी जाती हैं। बुवाई से पहले बीजों का थीरम या कार्बेन्डाजिम तथा राइजोबियम कल्चर से उपचार करना चाहिए। कतारों के बीच 30 सेंटीमीटर और पौधों के बीच 10 सेंटीमीटर दूरी रखनी चाहिए।एक एकड़ में खेती की लागत करीब 10 से 15 हजार रुपये आती है। अच्छी देखभाल से 5 से 7 क्विंटल उत्पादन मिल सकता है, जिसकी बाजार में कीमत 50 से 60 हजार रुपये तक पहुंच जाती है। इससे किसानों को अच्छा मुनाफा मिलता है।
65 से 70 दिनों में तैयार हो जाती है फसल
प्रगतिशील किसान शिवेंद्र सिंह के अनुसार, मूंग की फसल लगभग 65 से 70 दिनों में तैयार हो जाती है। इसकी अवधि कम होने के कारण किसान समय पर फसल काटकर अगली फसल की तैयारी भी आसानी से कर सकते हैं। कम समय में तैयार होने वाली यह फसल खेती की लागत और जोखिम दोनों को संतुलित रखने में मदद करती है।
कम बारिश की स्थिति में भी यदि खेत में आवश्यक नमी बनी रहे और उचित देखभाल की जाए, तो मूंग की अच्छी पैदावार प्राप्त की जा सकती है। यही कारण है कि कृषि विशेषज्ञ इसे खरीफ मौसम में एक व्यवहारिक विकल्प मानते हैं।
जलभराव से बचाना है सबसे जरूरी
हालांकि मूंग की फसल कम पानी में अच्छी तरह विकसित हो सकती है, लेकिन जलभराव इसके लिए सबसे बड़ा खतरा माना जाता है। यदि खेत में लंबे समय तक पानी जमा रहता है, तो पौधों की जड़ों को नुकसान पहुंच सकता है और फसल प्रभावित हो सकती है।
इसलिए किसानों को बुवाई से पहले खेत की ऐसी तैयारी करनी चाहिए, जिससे अतिरिक्त पानी आसानी से बाहर निकल सके। खेत में उचित जल निकासी व्यवस्था होने से पौधों की वृद्धि बेहतर रहती है और रोगों का खतरा भी कम हो सकता है।
लागत कम, मुनाफे की संभावना अधिक
मूंग की खेती का एक बड़ा फायदा इसकी अपेक्षाकृत कम लागत भी है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, एक एकड़ में मूंग की खेती की लागत लगभग 10,000 से 15,000 रुपये तक आ सकती है। इसमें बीज, खेत की तैयारी, उर्वरक, श्रम और अन्य आवश्यक कृषि कार्य शामिल हो सकते हैं।
यदि किसान अनुशंसित कृषि तकनीकों का पालन करें और मौसम अनुकूल रहे, तो एक एकड़ से लगभग 5 से 7 क्विंटल तक उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है।
कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि बदलते मौसम और अनिश्चित मानसून की स्थिति में किसानों को जल संरक्षण, उचित बीज चयन, संतुलित उर्वरक प्रबंधन और समय पर फसल की निगरानी पर विशेष ध्यान देना चाहिए। खेत में खरपतवार नियंत्रण, जल निकासी की व्यवस्था और समय-समय पर फसल का निरीक्षण करने से उत्पादन बेहतर बनाए रखने में मदद मिल सकती है।कम वर्षा वाले क्षेत्रों में मूंग की खेती किसानों के लिए एक व्यावहारिक और लाभकारी विकल्प बन सकती है। कम अवधि में तैयार होने वाली यह दलहनी फसल अपेक्षाकृत कम पानी की आवश्यकता, सीमित लागत और बेहतर बाजार मांग के कारण किसानों की आय बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। यदि किसान कृषि विशेषज्ञों की सलाह के अनुसार उन्नत किस्मों का चयन करें, बीज उपचार अपनाएं और खेत में जलभराव से बचाव सुनिश्चित करें, तो खरीफ सीजन में मूंग की खेती से बेहतर उत्पादन और संतोषजनक आर्थिक लाभ प्राप्त किया जा सकता है।
