नई दिल्ली। राष्ट्रीय दलहन आत्मनिर्भरता मिशन के तहत सरकार किसानों को अरहर, चना, मूंग, मसूर और उड़द जैसी दालों की खेती के लिए अच्छी क्वालिटी और सर्टिफाइड उन्नत बीजों की खरीद पर 50 प्रतिशत तक सब्सिडी दे रही है। इस योजना का उद्देश्य किसानों को कम खर्च में बेहतर पैदावार प्राप्त करने में मदद करना है।
यहां यह बता दें कि, देश में दालों की मांग लगातार बनी रहती है, लेकिन अक्सर सही बीज न मिलने से किसानों को अच्छी उपज नहीं मिल पाती। सरकार ने इस समस्या को दूर करने के लिए यह स्कीम शुरू की है, ताकि बीजों का खर्च आधा हो जाए और किसान नई किस्मों को अपनाकर बंपर उत्पादन कर सकें। विशेष रूप से पिछले पांच वर्षों में विकसित की गई नई वैरायटी के बीजों पर फोकस है, जो कम समय में पकने, सूखा सहन करने और कीट-बीमारियों से लड़ने में मजबूत हैं।
इन उन्नत बीजों से शुरुआती लागत कम होने के साथ बेहतर जमाव और मजबूत पौधों के कारण कुल पैदावार बढ़ती है, जिससे किसानों की आय में वृद्धि होती है। दलहन की फसलें मिट्टी की उर्वरता भी बढ़ाती हैं क्योंकि इनकी जड़ों में बैक्टीरिया हवा से नाइट्रोजन ग्रहण कर मिट्टी को उपजाऊ बनाते हैं। इससे अगली फसलों में खाद की जरूरत कम हो जाती है और कम पानी में भी अच्छा उत्पादन मिलता है।किसान इस योजना का लाभ लेने के लिए अपने जिले के कृषि विभाग, कृषि विज्ञान केंद्र या राज्य के आधिकारिक कृषि पोर्टल पर ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन कर सकते हैं। वेरिफिकेशन के बाद सब्सिडी सीधे बैंक खाते में ट्रांसफर हो जाती है।
क्यों जरूरी हैं उन्नत और प्रमाणित बीज?
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार किसी भी फसल की अच्छी पैदावार का आधार गुणवत्तापूर्ण बीज होता है। यदि किसान प्रमाणित और उन्नत किस्मों के बीजों का उपयोग करते हैं तो अंकुरण बेहतर होता है, पौधे अधिक मजबूत बनते हैं और फसल की उत्पादकता में वृद्धि होती है।
राष्ट्रीय दलहन आत्मनिर्भरता मिशन के तहत विशेष रूप से पिछले पांच वर्षों में विकसित नई किस्मों के बीजों को बढ़ावा दिया जा रहा है। इन बीजों को आधुनिक कृषि अनुसंधान के आधार पर विकसित किया गया है, जिससे वे बदलते मौसम और खेती की चुनौतियों के अनुरूप बेहतर प्रदर्शन कर सकें।
अंत में चलते चलते बताते चले कि, देश में दालों की बढ़ती मांग को देखते हुए उत्पादन बढ़ाना समय की आवश्यकता बन गया है। ऐसे में राष्ट्रीय दलहन आत्मनिर्भरता मिशन के तहत उन्नत बीजों पर दी जा रही 50 प्रतिशत सब्सिडी किसानों के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर साबित हो सकती है। इससे किसानों को गुणवत्तापूर्ण बीज कम लागत पर उपलब्ध होंगे, आधुनिक किस्मों को अपनाने में मदद मिलेगी और खेती की उत्पादकता बढ़ाने का मार्ग प्रशस्त होगा।
