नई दिल्ली। किसान फसल के लिए दिन-रात मेहनत करते हैं, इसलिए चावल की फसल की चमक और गुणवत्ता उनके लिए बेहद मायने रखती है। फसल को अच्छी तरह पोषण मिलने पर इसके दाने अच्छी तरह विकसित होते हैं और उनकी चमक भी नजर आने लगती है। इसके लिए किसान चावल की फसल के अनुसार आवश्यक पोषक तत्वों का स्प्रे करते हैं, जिससे फसल अच्छी होती है और कीमत भी बेहतर मिलती है। इससे तैयार होने वाले चावल की गुणवत्ता को बेहतर बनाए रखने में मदद मिलती है।
बता दें कि, धान में दाने बनने और भरने के समय सही पोषण देना बहुत जरूरी होता है। इस दौरान किसान जिंक और अन्य छोटे पोषक तत्वों वाले स्प्रे का इस्तेमाल फसल की जरूरत के अनुसार कर सकते हैं। इससे पौधे को जरूरी पोषण मिलने में मदद मिलती है और दानों के बढ़ने के साथ उनकी गुणवत्ता भी बेहतर होती जाती है। स्प्रे की मात्रा फसल के हिसाब से और खेत की स्थिति को देखकर ही रखें। ज्यादा मात्रा में स्प्रे करने से फसल को नुकसान भी होता है।
वही यह भी बताते चले कि, धान में जब बालियां निकलने लगती हैं और दाने बनने की शुरुआत होती है, तब फसल को ज्यादा देखभाल की जरूरत होती है। इस समय पौधे को पोषण और पानी मिलना जरूरी है। अगर इस स्थिति में किसी पोषक तत्व की कमी हो जाए तो दानों के विकास पर असर पड़ता है। इसलिए किसान खेत की रोज निगरानी करें। धान की फसल में जिंक की कमी होने पर पौधों को बढ़ने में परेशानी होती है और इसका असर दानों की गुणवत्ता पर भी पड़ सकता है। अगर खेत की मिट्टी में जिंक की कमी है तो कृषि विशेषज्ञ की सलाह से जिंक पर आधारित खाद या स्प्रे का इस्तेमाल किया जाता है। बिना जांच या जरूरत के बार-बार जिंक का इस्तेमाल न करें। मिट्टी और फसल की स्थिति देखकर ही जिंक का छिड़काव करें।
आखिर में बताते चले कि, फसल में स्प्रे करते समय मौसम का ध्यान रखना भी बेहद जरूरी है। तेज धूप में स्प्रे न करें और बारिश की संभावना होने पर भी स्प्रे का छिड़काव न करें, क्योंकि बारिश होने से स्प्रे का असर कम हो जाता है। किसान सुबह या शाम के समय मौसम देखकर स्प्रे कर सकते हैं। चावल के दाने चमकीले और अच्छी गुणवत्ता वाले हों, इसके लिए सिर्फ स्प्रे पर निर्भर रहना जरूरी नहीं है। खेत में पानी का सही स्रोत, संतुलित खाद, कीट और रोगों से बचाव के साथ फसल की समय-समय पर निगरानी करनी भी जरूरी है। किसान अगर धान की फसल को सही समय पर पोषण और जरूरी देखभाल देते हैं तो दानों के अच्छे विकास में मदद मिलती है और तैयार चावल की गुणवत्ता भी बेहतर होती जाती है।
