समाचार मिर्ची

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नई दिल्ली। गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर भारत सरकार द्वारा घोषित किए गए पद्म पुरस्कार 2026 ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि देश केवल बड़े मंचों और सुर्खियों में रहने वालों से नहीं, बल्कि उन गुमनाम नायकों से भी बनता है जिन्होंने जीवन भर चुपचाप समाज की सेवा की। इस वर्ष 39 हजार से अधिक नामांकनों में से 131 लोगों को पद्म विभूषण, पद्म भूषण और पद्मश्री से सम्मानित किए जाने की घोषणा की गई। इन नामों में कलाकार, शिक्षक, समाजसेवी, वैज्ञानिक, चिकित्सक और लोकसंस्कृति के संरक्षक शामिल हैं, जिनका संघर्ष और योगदान किसी भी संवेदनशील व्यक्ति को भावुक कर सकता है।

गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर सरकार ने पद्म पुरस्कार 2026 का ऐलान किया. 39 हजार से ज्यादा नामांकन में से 131 विजेताओं का सेलेक्शन हुआ,भारत सरकार ने गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर रविवार को पद्म पुरस्कारों का ऐलान किया. इसमें पूरे भारत के अलग-अलग क्षेत्रों के गुमनाम नायकों को शामिलहै …

पांच प्रेरक कहानियां…

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पहली बार शामिल किए गए ये 10 जिले

पुरस्कार के लिए 30 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 84 जिलों को शामिल किया गया. इसमें 10 जिले ऐसे हैं,पांच कहानियां खास तौर पर चर्चा में हैं।जो उम्र, अभाव, उपेक्षा और कठिन परिस्थितियों के बावजूद उम्मीद और समर्पण का संदेश देती हैं।

1. सिमांचल पात्रो: 99 साल की उम्र में लोककला को मिला राष्ट्रीय सम्मान

ओडिशा के प्रसिद्ध लोक कलाकार सिमांचल पात्रो को 99 वर्ष की उम्र में पद्मश्री पुरस्कार के लिए चुना जाना इस सूची की सबसे भावुक कहानी मानी जा रही है। दशकों तक उन्होंने ओडिशा की पारंपरिक लोककला और लोकगीतों को जीवित रखा। आर्थिक तंगी, संसाधनों की कमी और बदलते समय में लोककला के प्रति घटती रुचि के बावजूद उन्होंने कभी अपने हुनर से समझौता नहीं किया। गांव-गांव जाकर प्रस्तुति देना, नई पीढ़ी को प्रशिक्षण देना और परंपरा को आगे बढ़ाना उनका जीवन उद्देश्य रहा। आज जब उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान मिला है, तो यह केवल एक व्यक्ति नहीं, बल्कि पूरी लोकसंस्कृति का सम्मान है।

2. दूरदराज़ के गांव से शिक्षा की अलख जगाने वाले शिक्षक
इस वर्ष के पद्म पुरस्कारों में एक ऐसे शिक्षक को भी चुना गया है, जिन्होंने पहाड़ी और आदिवासी इलाकों में शिक्षा की लौ जलाई। सीमित संसाधनों, खराब बुनियादी ढांचे और सामाजिक बाधाओं के बावजूद उन्होंने बच्चों को स्कूल से जोड़ने का अभियान चलाया। कई वर्षों तक बिना अतिरिक्त वेतन के काम करते हुए उन्होंने यह साबित किया कि शिक्षा केवल नौकरी नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी है। आज उनके प्रयासों से सैकड़ों बच्चे उच्च शिक्षा की ओर बढ़ चुके हैं।

3. महिला सशक्तिकरण की मिसाल बनी सामाजिक कार्यकर्ता
पद्म पुरस्कार 2026 की सूची में एक महिला समाजसेवी का नाम भी शामिल है, जिन्होंने ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए जीवन समर्पित कर दिया। स्वयं कठिन परिस्थितियों से निकलकर उन्होंने सिलाई, हस्तशिल्प और लघु उद्योगों के जरिए हजारों महिलाओं को रोजगार से जोड़ा। उनका संघर्ष इस बात का उदाहरण है कि अगर अवसर और मार्गदर्शन मिले, तो महिलाएं न केवल अपने परिवार बल्कि पूरे समाज की तस्वीर बदल सकती हैं।

4. जनसेवा में समर्पित स्वास्थ्यकर्मी
एक अन्य प्रेरक कहानी एक ऐसे स्वास्थ्यकर्मी की है, जिन्होंने दशकों तक दूरदराज़ इलाकों में चिकित्सा सेवाएं दीं। सीमित दवाइयों और सुविधाओं के बावजूद उन्होंने कभी मरीजों को निराश नहीं लौटाया। महामारी, प्राकृतिक आपदाओं और सामान्य दिनों—हर परिस्थिति में उनका समर्पण अडिग रहा। पद्म पुरस्कार के जरिए देश ने उनके निस्वार्थ योगदान को पहचान दी है।

5. पर्यावरण संरक्षण के लिए जीवन समर्पित करने वाले कर्मयोगी
इस सूची में एक पर्यावरण कार्यकर्ता भी शामिल हैं, जिन्होंने जंगलों और जलस्रोतों को बचाने के लिए वर्षों तक संघर्ष किया। स्थानीय समुदायों को जोड़कर उन्होंने संरक्षण को जनआंदोलन बनाया। उनके प्रयासों से कई क्षेत्रों में हरियाली लौटी और जलसंकट कम हुआ। यह सम्मान पर्यावरण संरक्षण के महत्व को भी रेखांकित करता है।

कुल मिलाकर, इस वर्ष के पद्म पुरस्कार केवल अलंकरण नहीं, बल्कि संघर्ष, समर्पण और सेवा की जीवंत कहानियां हैं। 99 साल की उम्र में मिला सम्मान हो या जीवन भर की निस्वार्थ मेहनत—इन कहानियों ने यह साबित कर दिया कि देश अपने सच्चे नायकों को कभी नहीं भूलता।

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