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 नई दिल्ली। भारत-पाक में सीजफायर के एलान के बाद दोनों देशों में हालात सामान्य हो गए हैं। बीती रात जम्मू-कश्मीर और अंतरराष्ट्रीय सीमा से लगे अन्य इलाकों में भी शांति बनी रही। सीजफायर के एलान से पहले अमेरिका ने दावा किया कि ये सब उसने करवाया, लेकिन इसके पीछे की कहानी कुछ और ही है।

India-Pak Conflict भारत के ऑपरेशन सिंदूर से पाकिस्तान को काफी नुकसान पहुंचा है। भारतीय सेना ने जिस तरह पाक के कई एयरबेस को तबाह किया उससे पड़ोसी मुल्क को एक बड़ा खतरा सताने लगा। यही कारण है कि वो सीजफायर के लिए हाथ जोड़ने लगा। माना जा रहा है कि इसी डर से पाकिस्तानी डीजीएमओ ने भारत से सीजफायर की गुहार लगाई।

परमाणु जखीरे का था पाक को डर

दरअसल, पाकिस्तान के हमलों के बाद जब भारतीय सेना ने जवाबी हमले किए तो उसकी जद में पाक के परमाणु जखीरे आने वाले थे, जिससे घबराया पाकिस्तान सीजफायर के लिए हाथ जोड़ने लगा। बीते दिन सेना की प्रेस कॉन्फ्रेंस में भी ये बात साफ हुई। 

इस कारण सीजफायर के लिए जोड़े हाथ

  • सेना ने जैसे ही पाकिस्तानी सेना के हेडक्वार्टर से सटे नूर खान एयरबेस के पास हमले किए, पाकिस्तान की मानो हालत खराब हो गई।
  • ऐसा इसलिए, क्योंकि नूर खान एयरबेस के पास ही पाकिस्तान का परमाणु कमांड सेंटर है। भारत के सटीक हमले में नूर खान ऐयरबेस को भारी नुकसान पहुंचाया। 
  • उधर, परमाणु कमांड सेंटर के भारतीय मिसाइल के जद में आने के खतरे ने पाक की नींदे हराम कर दी। माना जा रहा है कि इसी कारण पाकिस्तानी डीजीएमओ ने भारत को फोन करके सीजफायर की बात की।

अब भी दबाव में पाक

सीजफायर के बाद भी भारत की ओर से सिंधु जल समझौते को निलंबित करने से लेकर लंबे समय तक कूटनीतिक और आर्थिक नाकेबंदी पाकिस्तान के लिए घातक साबित होगा। उच्च पदस्थ सूत्रों के अनुसार जिस परमाणु जखीरे पर पाकिस्तान को नाज था और भारत को बार-बार गीदड़ भभकी देता था, वह भारतीय मिसाइलों की जद में आ गया था। 

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