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पाकिस्तान। पाकिस्तान में आर्थिक संकट गहराता जा रहा है। तेल की कमी और कीमतों में उछाल के कारण पेट्रोल की कीमत 458.41 रुपये प्रति लीटर और हाई स्पीड डीजल 520.35 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच गई थी। बाद में जन विरोध के चलते पेट्रोल की कीमत 80 रुपये घटाकर 378 रुपये प्रति लीटर कर दी गई। इससे पेट्रोल पंपों पर अफरा-तफरी मची हुई है और आटा, चावल जैसी जरूरी वस्तुओं की कीमतें भी बढ़ गई हैं।

देश का कुल कर्ज जनवरी 2026 तक 79,322 अरब पाकिस्तानी रुपये पहुंच गया है, जिसमें घरेलू कर्ज 55,978 अरब और विदेशी कर्ज 23,344 अरब रुपये है। यह कर्ज जीडीपी का करीब 70 प्रतिशत है। संयुक्त अरब अमीरात ने महीने के अंत तक 3.5 अरब डॉलर चुकाने की मांग की है और कोई नया ऋण नहीं दिया जा रहा है।

महंगाई दर फरवरी के 7 प्रतिशत से बढ़कर 7.3 प्रतिशत हो गई है। ब्रेड, दूध, आटा, दाल, चावल और खाना पकाने के तेल जैसी खाद्य वस्तुएं आम लोगों की पहुंच से बाहर हो रही हैं। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और अफगानिस्तान से आयात प्रभावित होने के कारण यह स्थिति बनी है।सरकार ने ऊर्जा बचत के उपाय शुरू कर दिए हैं। सरकारी वाहनों के उपयोग में 60 प्रतिशत कटौती, सांसदों और मंत्रियों के वेतन में कटौती तथा गैर-जरूरी खर्चों में 20 प्रतिशत कमी की गई है। 7 अप्रैल से ज्यादातर इलाकों में बाजार और शॉपिंग मॉल रात 8 बजे बंद करने पड़ रहे हैं, जिससे 8 बजे के बाद देश अंधेरे में डूब जाता है।

पूर्व वित्त मंत्री हाफिज पाशा ने चेतावनी दी है कि अगर मध्य पूर्व युद्ध जारी रहा और कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर से ऊपर गई तो पाकिस्तान की जीडीपी पर 1-1.5 प्रतिशत नकारात्मक असर पड़ सकता है।

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