नई दिल्ली। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना (PM Kisan Samman Nidhi) देश की सबसे बड़ी किसान सहायता योजनाओं में से एक है, जिसके तहत केंद्र सरकार हर साल पात्र किसानों को 6,000 रुपये की आर्थिक मदद देती है। यह राशि तीन बराबर किस्तों में सीधे किसानों के बैंक खातों में ट्रांसफर की जाती है। इस योजना का लाभ देशभर के करीब 9 करोड़ किसानों को मिल रहा है। वहीं, बिहार में राज्य सरकार की अतिरिक्त सहायता के चलते किसानों को कुल 9,000 रुपये सालाना मिलने की बात कही जा रही है।
22वीं किस्त में देरी के संभावित कारण
हालांकि सरकार की ओर से आधिकारिक तौर पर देरी की कोई एक स्पष्ट वजह नहीं बताई गई है, लेकिन कुछ प्रमुख कारण सामने आ रहे हैं, जिनकी वजह से भुगतान में देरी हो सकती है।
1. फार्मर आईडी अनिवार्य किए जाने का फैसला
जनवरी में सरकार की ओर से यह घोषणा की गई थी कि पीएम किसान योजना का लाभ लेने के लिए फार्मर आईडी को अनिवार्य किया जा रहा है। इसके बाद कई राज्यों में विशेष अभियान चलाकर किसानों की फार्मर आईडी बनाने का काम शुरू किया गया।
फार्मर आईडी के जरिए सरकार किसानों की पहचान, भूमि रिकॉर्ड और अन्य जानकारियों को डिजिटल रूप से सत्यापित करना चाहती है, ताकि सही किसानों तक ही योजना का लाभ पहुंचे। इस प्रक्रिया में बड़े स्तर पर डेटा अपडेट और सत्यापन का काम चल रहा है, जिससे भुगतान प्रक्रिया में देरी होना स्वाभाविक माना जा रहा है।
2. फर्जी लाभार्थियों की छंटनी
22वीं किस्त में देरी का दूसरा बड़ा कारण फर्जी लाभार्थियों की पहचान और छंटनी को माना जा रहा है। कई राज्यों में जांच के दौरान यह सामने आया कि कुछ लोग गलत तरीके से योजना का लाभ ले रहे थे।
सरकार की ओर से कहा गया है कि कई मामलों में एक ही जमीन पर कई लोगों द्वारा लाभ लिया जा रहा था या ऐसे लोग भी किस्त प्राप्त कर रहे थे जो योजना के पात्र नहीं थे।
3. फार्मर आईडी के लिए आवेदन में दिक्कतें
फार्मर आईडी बनवाने की प्रक्रिया को लेकर भी किसानों को कुछ तकनीकी और व्यावहारिक समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। कई किसान खुद से ऑनलाइन आवेदन नहीं कर पा रहे हैं, जिसके कारण कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) और विशेष शिविरों में लंबी कतारें देखी जा रही हैं।
प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना की शुरुआत छोटे और सीमांत किसानों को आर्थिक सहायता देने के उद्देश्य से की गई थी। खेती से जुड़े खर्चों जैसे बीज, खाद, कीटनाशक और अन्य जरूरतों के लिए यह सहायता किसानों के लिए काफी मददगार साबित हुई है।इस योजना के तहत सरकार सीधे किसानों के बैंक खातों में पैसा ट्रांसफर करती है, जिससे बिचौलियों की भूमिका खत्म होती है और पारदर्शिता बनी रहती है। यही कारण है कि यह योजना देश के ग्रामीण क्षेत्रों में बेहद लोकप्रिय है।
कुल मिलाकर, पीएम किसान योजना की 22वीं किस्त में हो रही देरी के पीछे फार्मर आईडी की अनिवार्यता, लाभार्थियों का सत्यापन और फर्जी मामलों की छंटनी जैसे कारण सामने आ रहे हैं। हालांकि इससे किसानों को थोड़ी असुविधा हो रही है, लेकिन सरकार का उद्देश्य योजना को अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाना है।
