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समाचार मिर्ची

लखनऊ, : अयोध्या के श्रीराम मंदिर में चढ़ावा और चंदा चोरी मामले में एसआईटी की प्रारंभिक रिपोर्ट के बाद श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की बैठक 6 जुलाई को होने जा रही है। इस बैठक में ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा के इस्तीफे को स्वीकार करने पर विचार-विमर्श हो सकता है।

ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। मामले में एसआईटी की रिपोर्ट के बाद एफआईआर दर्ज हुई और आठ लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है। दोनों से पूछताछ भी हो चुकी है।

इस संंबंंध में जानकारी दे दें कि, श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के बायलॉज के अनुसार इस्तीफा स्वीकार करने के लिए दो-तिहाई बहुमत जरूरी है। ट्रस्ट के सदस्य वोटिंग के माध्यम से ही फैसला लेंगे। यदि दो-तिहाई सदस्य इस्तीफा स्वीकार करते हैं तो चंपत राय महासचिव पद से हट सकते हैं, लेकिन ट्रस्ट के सदस्य बने रहेंगे। ट्रस्ट बायलॉज में केवल पद और दायित्व से मुक्त करने का प्रावधान है।ट्रस्ट की इस बैठक पर सभी की निगाहें लगी हुई हैं। बैठक में चढ़ावा चोरी मामले पर भी चर्चा होने की संभावना है। इससे पहले ट्रस्ट की बैठक रामलला की मूर्ति चयन के समय हुई थी।

श्रद्धालुओं की अपेक्षा: निष्पक्ष फैसला और पारदर्शिता

देशभर के राम भक्तों की अपेक्षा है कि ट्रस्ट इस पूरे मामले में पारदर्शी और नियमों के अनुरूप निर्णय लेगा। श्रद्धालुओं का मानना है कि यदि किसी स्तर पर कोई अनियमितता हुई है तो उसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और दोषियों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।

साथ ही, वे यह भी मानते हैं कि भगवान श्रीराम के प्रति करोड़ों लोगों की आस्था किसी प्रशासनिक विवाद से प्रभावित नहीं होती। मंदिर की गरिमा बनाए रखने के लिए आवश्यक है कि ट्रस्ट अपने बायलॉज के अनुसार निष्पक्ष और संस्थागत प्रक्रिया का पालन करे।

चलते चलते अंत में बताते चले कि, यदि आवश्यक दो-तिहाई बहुमत प्राप्त होता है तो चंपत राय और डॉ. अनिल मिश्रा अपने-अपने पदों से मुक्त हो सकते हैं। वहीं यदि बहुमत नहीं मिलता, तो स्थिति अलग हो सकती है। ऐसे में अंतिम फैसला पूरी तरह ट्रस्ट के सदस्यों के मतदान और बायलॉज में निर्धारित प्रक्रिया पर निर्भर करेगा। देशभर के श्रद्धालु और आम नागरिक अब 6 जुलाई को होने वाली इस बैठक के निर्णय का इंतजार कर रहे हैं।

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