नई दिल्ली। भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया है। ईरान युद्ध के कारण मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव से रुपया तेजी से गिर रहा है। रुपया 93 के पार टूटकर नए रिकॉर्ड लो पर पहुंचा है, जो 2026 में अब तक 4 प्रतिशत की गिरावट दर्शाता है। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यदि युद्ध लंबा खिंचा तो रुपया 100 के स्तर तक टूट सकता है।
युद्ध के कारण कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आया है, जिससे भारत की आयात बिल बढ़ गई है। भारत अपनी तेल जरूरतों का लगभग 85 प्रतिशत आयात करता है, इसलिए बढ़ती कीमतें व्यापार घाटे को बढ़ावा दे रही हैं और रुपए पर दबाव डाल रही हैं। गैस आपूर्ति में व्यवधान और ऊर्जा संकट ने भी स्थिति को और बिगाड़ दिया है। वैश्विक अनिश्चितता से विदेशी निवेशकों की बिकवाली बढ़ी है, जिससे रुपए की कमजोरी और गहराई है।
इस गिरावट से आयात महंगा होने के कारण महंगाई बढ़ने का खतरा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मध्य पूर्व संघर्ष 3-4 सप्ताह में सुलझ गया तो स्थिति सामान्य हो सकती है, लेकिन लंबे समय तक जारी रहने पर अर्थव्यवस्था पर गहरा असर पड़ेगा। रुपए की यह गिरावट एशियाई मुद्राओं में सबसे कमजोर प्रदर्शन कर रही है।
