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समाचार मिर्ची

महाराष्ट्र के सातारा जिले के आरे दरे (या दरे पोस्ट आरे) गांव में 11 जनवरी 2026 को एक ऐसी त्रासदी घटी, जिसने न केवल पूरे गांव को बल्कि सोशल मीडिया और देशभर को गहरे सदमे में डाल दिया। भारतीय सेना के वीर जवान प्रमोद परशुराम जाधव (32 वर्ष), जो अपनी पत्नी की डिलीवरी के लिए छुट्टी पर घर आए थे, एक दर्दनाक सड़क हादसे में अपनी जान गंवा बैठे। हादसे के महज कुछ घंटों बाद उनकी पत्नी ने एक बेटी को जन्म दिया। लेकिन पिता बनने की खुशी उन्हें कभी नसीब नहीं हुई।

जानकारी दे दें कि, यह पूरी घटना सातारा जिले के आरे दरे (Dare) गांव से जुड़ी है। प्रमोद जाधव भारतीय सेना में तैनात थे और हाल ही में छुट्टी लेकर घर आए थे। उनकी पत्नी गर्भवती थीं और बच्चे के जन्म के समय प्रमोद खुद मौजूद रहना चाहते थे। इसीलिए उन्होंने छुट्टी ली थी। परिवार के साथ कुछ पल बिताने का यह फैसला किस्मत ने कितना क्रूर कर दिया, यह किसी ने नहीं सोचा था।

गौरतलब हैं कि, अंतिम संस्कार के दिन का दृश्य किसी भी इंसान के दिल को चीर देने वाला था। प्रमोद की पत्नी अभी भी प्रसव के बाद की कमजोरी से उबर नहीं पाई थीं। डॉक्टरों की सलाह पर उन्हें स्ट्रेचर पर ही श्मशान भूमि ले जाया गया। स्ट्रेचर पर लेटे-लेटे ही उन्होंने तिरंगे में लिपटे अपने पति के चेहरे को हाथ से छुआ और आखिरी सलाम किया। उसी समय एक अन्य महिला (संभवतः परिवार की सदस्य) गोद में नवजात बेटी को लेकर खड़ी थीं। छोटी-सी बच्ची को गोद में लिए हुए यह परिवार तिरंगे के नीचे खड़ा था, जहां पिता की अंतिम यात्रा हो रही थी।

यह घटना हमें याद दिलाती है कि जीवन कितना अनिश्चित है। एक पल में खुशी और दुख एक साथ आ सकते हैं। प्रमोद जाधव जैसे असंख्य जवान देश की सेवा में लगे रहते हैं और उनके परिवार हर पल चिंता में जीते हैं। इस दुखद घटना के बाद पूरा देश इस परिवार के साथ खड़ा है। नवजात बेटी के भविष्य की कामना करते हुए लोग प्रार्थना कर रहे हैं कि ईश्वर इस छोटी बच्ची और उसकी मां को हिम्मत और ताकत दे।

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