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समाचार मिर्ची

नई दिल्ली।इस साल 30 जुलाई से शुरू हो रहे सावन का कैलेंडर 11 साल पुरानी याद ताजा करेगा। 2015 की तरह इस बार भी सावन के चारों सोमवार 3, 10, 17 और 24 अगस्त को पड़ रहे हैं। हालांकि 2015 में रक्षाबंधन 29 अगस्त को था, जबकि इस बार 28 अगस्त को रहेगा। यानी सावन के सोमवार तो वही तारीखें लेकर लौटे हैं, लेकिन राखी एक दिन पहले आ रही है।ज्योतिषियों के अनुसार यह संयोग ग्रेगोरियन (अंग्रेजी) कैलेंडर, चंद्र पंचांग और अधिवर्ष (लीप ईयर) के गणितीय मेल का परिणाम है। यही वजह है कि कुछ वर्षों के अंतराल पर तारीखों और वार का लगभग वही क्रम दोबारा बन जाता है।

इस संबंध में ज्योतिषाचार्य स्मिता पंडित बताती हैं कि सामान्य वर्ष 365 दिन का होता है, इसलिए हर वर्ष किसी भी तारीख का वार एक दिन आगे बढ़ जाता है। वहीं लीप ईयर 366 दिन का होने से वार दो दिन आगे खिसकते हैं। इस कारण कुछ वर्ष बाद कैलेंडर का पैटर्न दोहराया जाता है। ग्रेगोरियन कैलेंडर में कई बार 6, 11, 17 या 28 वर्ष के अंतराल पर किसी महीने की तारीखें और वार लगभग उसी क्रम में दोबारा दिखाई दे सकते हैं। 2015 और इस वर्ष सावन के चारों सोमवार का एक तारीख पर पड़ना यही संयोग है।

वही यह बताते चले कि, महाराष्ट्र और गुजरात सहित अमांत पंचांग का पालन करने वाले समाज में श्रावण मास 13 अगस्त से शुरू होकर 10 सितंबर तक चलेगा। वहां सावन के सोमवार 17, 24, 31 अगस्त और 7 सितंबर को होंगे। इसका कारण यह है कि वहां श्रावण मास की शुरुआत अमावस्या के अगले दिन से मानी जाती है, जबकि उत्तर भारत के अधिकांश हिस्सों में पूर्णिमा के अगले दिन से सावन आरंभ होता है।

11 साल बाद फिर दोहराया गया वही क्रम

इस वर्ष सावन के चारों सोमवार 3 अगस्त, 10 अगस्त, 17 अगस्त और 24 अगस्त को पड़ रहे हैं। यही तिथियां वर्ष 2015 में भी सावन सोमवार थीं। ऐसे संयोग अक्सर लोगों का ध्यान आकर्षित करते हैं, क्योंकि धार्मिक पर्वों और व्रतों का समय भारतीय समाज में विशेष महत्व रखता है।

हालांकि रक्षाबंधन की तिथि इस बार अलग है। 2015 में यह पर्व 29 अगस्त को मनाया गया था, जबकि 2026 में यह 28 अगस्त को रहेगा। इसका कारण चंद्र पंचांग के अनुसार तिथियों की गणना में होने वाला अंतर है।

क्यों दोहराता है कैलेंडर का पैटर्न?

ज्योतिषाचार्यों के अनुसार कैलेंडर में इस तरह की समानता पूरी तरह गणितीय कारणों से बनती है।

ज्योतिषाचार्य स्मिता पंडित बताती हैं कि सामान्य वर्ष 365 दिनों का होता है। इसलिए प्रत्येक वर्ष किसी भी निश्चित तारीख का वार सामान्यतः एक दिन आगे बढ़ जाता है। वहीं लीप ईयर में वर्ष 366 दिनों का होने के कारण तारीखों का वार दो दिन आगे खिसक जाता है।

इन्हीं बदलावों के कारण कुछ वर्षों के बाद तारीखों और वार का क्रम फिर से पहले जैसा दिखाई देने लगता है। ग्रेगोरियन कैलेंडर में कई बार 6, 11, 17 या 28 वर्षों के अंतराल पर किसी महीने का कैलेंडर लगभग पहले जैसा दोहराया जा सकता है। सावन 2026 और 2015 के बीच दिखाई दे रही समानता भी इसी गणितीय व्यवस्था का परिणाम मानी जा रही है।

सावन का धार्मिक महत्व

सावन का महीना भगवान शिव की आराधना के लिए सबसे पवित्र महीनों में से एक माना जाता है। इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु सावन सोमवार व्रत, जलाभिषेक, रुद्राभिषेक और शिव मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना करते हैं।

मान्यता है कि सावन में श्रद्धा और नियमपूर्वक शिव पूजा करने से मानसिक शांति, आध्यात्मिक उन्नति और सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होती है। हालांकि धार्मिक मान्यताएं व्यक्तिगत आस्था और परंपराओं पर आधारित होती हैं।

सावन के दौरान मंगला गौरी व्रत, नाग पंचमी, हरियाली तीज, कामिका एकादशी, सावन शिवरात्रि, पुत्रदा एकादशी और रक्षाबंधन जैसे अनेक प्रमुख पर्व भी मनाए जाते हैं, जिससे पूरे महीने का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व बढ़ जाता है।

अंत में चलते चलते बता दें कि, 11 वर्षों बाद सावन सोमवार का ठीक उसी क्रम में आना स्वाभाविक रूप से लोगों की जिज्ञासा का कारण बना है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह पूरी तरह कैलेंडर और खगोलीय गणनाओं का परिणाम है। इसे किसी विशेष शुभ-अशुभ संकेत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए, बल्कि यह समय-गणना की वैज्ञानिक और पारंपरिक प्रणालियों का एक रोचक उदाहरण है।सावन 2026 का यह कैलेंडर जहां धार्मिक आस्था रखने वालों के लिए विशेष महत्व रखता है, वहीं यह पंचांग, ज्योतिष और कैलेंडर विज्ञान में रुचि रखने वाले लोगों के लिए भी अध्ययन का विषय बन गया है। उत्तर भारत और अमांत पंचांग का पालन करने वाले राज्यों में तिथियों का अंतर भारतीय सांस्कृतिक विविधता और पंचांग परंपराओं की समृद्ध विरासत को भी दर्शाता है।

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