नई दिल्ली। ती में ट्रैक्टर, रोटावेटर, कल्टीवेटर, थ्रेसर और सीड ड्रिल जैसे कृषि यंत्रों का इस्तेमाल लगातार बढ़ रहा है। ये मशीनें किसानों का काम आसान बनाती हैं और समय बचाती हैं। कई साल इस्तेमाल के बाद जब ये यंत्र पुराने हो जाते हैं तो उन्हें बेचने की जरूरत पड़ती है। गांव में सही खरीदार खोजने में दिक्कत होती है क्योंकि स्थानीय व्यापारी अक्सर कम दाम लगाते हैं और किसानों के पास खरीदार तलाशने के सीमित विकल्प रह जाते हैं।
अब डिजिटाइजेशन की वजह से पुराने कृषि यंत्रों को ऑनलाइन बेचना आसान हो गया है। कई डिजिटल प्लेटफॉर्म किसानों को सीधे खरीदारों से जोड़ रहे हैं। किसान मशीन की फोटो, मॉडल, कंडीशन और कीमत की जानकारी डालकर लिस्टिंग बना सकते हैं। इससे मशीन की पहुंच एक गांव तक सीमित नहीं रहती बल्कि दूसरे जिलों और राज्यों तक खरीदारों से बातचीत संभव हो जाती है। सेकंड हैंड कृषि मशीनरी का ऑनलाइन बाजार तेजी से बढ़ रहा है।
यहां हम आपको बता दें कि, सरकार की एफएआरएमएस ऐप पर कृषि मशीनरी की खरीद-बिक्री की सुविधा उपलब्ध है। इसके अलावा मायहाल, ट्रैक्टरबाजार और खेतीगाड़ी जैसे प्राइवेट डिजिटल प्लेटफॉर्म पर ट्रैक्टर के साथ रोटावेटर, कल्टीवेटर, थ्रेसर और अन्य उपकरणों की लिस्टिंग की जा सकती है। खरीदार इन जानकारियों को देखकर सीधे संपर्क कर सकते हैं। इससे ज्यादा खरीदारों तक पहुंच बनती है और अच्छी कंडीशन वाली मशीन के लिए बेहतर रेट मिलने की संभावना बढ़ जाती है। ऑनलाइन सौदा करते समय खरीदार की पहचान, पेमेंट का तरीका और मशीन के कागजात की जांच जरूर कर लें। ऑनलाइन बाजार के अलावा देश के कुछ शहरों में छोटे-छोटे बाजार भी हैं जहां जाकर मशीनें बेची या खरीदी जा सकती हैं।
बताते चले कि, बेचने से पहले मशीन की सफाई कराएं, छोटी खराबियां ठीक करें और अलग-अलग एंगल से साफ तस्वीरें खींचें। लिस्टिंग में मॉडल, खरीद का साल, इस्तेमाल की अवधि और सर्विस रिकॉर्ड जैसी जानकारी दें। बिल, रजिस्ट्रेशन और अन्य कागजात तैयार रखें। कीमत तय करने से पहले उसी मॉडल की पुरानी मशीनों की ऑनलाइन कीमत देखकर बाजार के हिसाब से उचित रेट रखें।
ऑनलाइन बाजार से बढ़ी खरीदारों तक पहुंच
डिजिटल प्लेटफॉर्म पर पुरानी कृषि मशीनरी की बिक्री का सबसे बड़ा फायदा यह है कि किसान अपनी मशीन की जानकारी केवल स्थानीय बाजार तक सीमित नहीं रखते। ऑनलाइन लिस्टिंग के जरिए दूसरे गांवों, जिलों और कई मामलों में दूसरे राज्यों के संभावित खरीदारों तक भी पहुंच बनाई जा सकती है।
किसान मशीन की तस्वीरें, मॉडल, खरीद का वर्ष, इस्तेमाल की अवधि, मशीन की स्थिति और अपेक्षित कीमत जैसी जानकारी अपलोड कर सकते हैं। संभावित खरीदार इन विवरणों को देखकर किसान से संपर्क कर सकते हैं और मशीन के बारे में अतिरिक्त जानकारी मांग सकते हैं।
इससे किसान के पास एक ही मशीन के लिए अधिक संभावित खरीदारों से बातचीत करने का अवसर हो सकता है। अच्छी स्थिति में मौजूद मशीन के लिए इससे बाजार के अनुरूप बेहतर कीमत मिलने की संभावना भी बढ़ सकती है। हालांकि, ऑनलाइन लिस्टिंग का मतलब यह नहीं है कि हर मशीन को निश्चित रूप से अधिक कीमत मिलेगी। अंतिम कीमत मशीन की हालत, मॉडल, मांग, स्थान और खरीदार की पेशकश पर निर्भर करेगी।
पुराने कृषि यंत्र की लिस्टिंग में क्या जानकारी दें?
ऑनलाइन मशीन बेचते समय केवल यह लिखना पर्याप्त नहीं है कि कृषि यंत्र पुराना है और बिक्री के लिए उपलब्ध है। खरीदार को मशीन की पूरी जानकारी मिलने पर उसके लिए निर्णय लेना आसान होता है।
लिस्टिंग तैयार करते समय किसान को इन जानकारियों का उल्लेख करना चाहिए—
- कृषि यंत्र का ब्रांड और मॉडल
- खरीद का वर्ष
- मशीन कितने समय से इस्तेमाल हो रही है
- कुल अनुमानित उपयोग
- मशीन की वर्तमान स्थिति
- इंजन या प्रमुख हिस्सों की स्थिति, जहां लागू हो
- हाल में कराई गई सर्विस या मरम्मत
- इंजन या प्रमुख हिस्सों की स्थिति, जहां लागू हो
- हाल में कराई गई सर्विस या मरम्मत
- उपलब्ध एक्सेसरीज
- मशीन की लोकेशन
- अपेक्षित कीमत
- बिक्री का कारण, यदि बताना चाहें
जितनी स्पष्ट जानकारी दी जाएगी, उतना ही खरीदार के साथ शुरुआती बातचीत में समय बच सकता है
कुल मिलाकर, पुराने कृषि यंत्रों को बेचने के लिए अब किसान केवल गांव के स्थानीय व्यापारी पर निर्भर नहीं हैं। डिजिटल प्लेटफॉर्म ने उन्हें बड़े बाजार तक पहुंच बनाने का विकल्प दिया है। FARMS ऐप सहित उपलब्ध सरकारी और निजी डिजिटल माध्यमों पर मशीन की सही जानकारी, स्पष्ट तस्वीरें और उचित कीमत के साथ लिस्टिंग करने से संभावित खरीदारों तक पहुंच बढ़ाई जा सकती है।
