बांग्लादेश की अंतर्राष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण (International Crimes Tribunal-1, ICT-1) ने 17 नवंबर 2025 को एक ऐतिहासिक और विवादास्पद फैसला सुनाया है: पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को मानवता के खिलाफ अपराधों (crimes against humanity) में दोषी ठहराते हुए फांसी की सजा सुनाई गई है।
शेख हसीना की पार्टी आवामी लीग के छात्र लीग और युवा लीग समेत अलग-अलग शाखाओं ने ढाका विश्वविद्यालय के स्टूडेंट्स पर हल्ला बोल दिया। शेख हसीना ने मानवता के खिलाफ अपराध किया है। 5 अगस्त के दिन चंखारपुल में 6 प्रदर्शनकारियों को मारा गया था। शेख हसीना के आदेश पर तत्कालीन गृह मंत्री और आईजी ने एक्शन लिया, जिसमें कई छात्रों की मौत हो गई थी।
अभियोगियों का पक्ष और बहिर्वास
- शेख हसीना और असदुज्जमां खान, दोनों ही इसके समय भारत में निर्वासित हैं। अदालत ने उन्हें भगोड़ा (fugitive) घोषित किया है
- हसीना ने ट्रिब्यूनल को “राजनीतिक रूप से प्रेरित” बताया है और प्रक्रिया को अवैध या पक्षपाती करार दिया है।
- उनके वकील द्वारा यह तर्क भी पेश किया गया कि हसीना को सही कानूनी तरीके से बहस करने का अवसर नहीं मिल पाया, क्योंकि उनकी भूमिका और प्रश्न-विचार को पूरी स्वतंत्रता नहीं दी गई।
बता दें कि, यह फैसला न सिर्फ एक राजनैतिक मोड़ है, बल्कि बांग्लादेश के इतिहास में गहरा निशान छोड़ेगा। अगर फांसी अमल में लाई गई, तो यह बांग्लादेश की राजनीति के भविष्य को पूरी तरह बदल सकता है। अनेक परिवारों को न्याय मिल सकता है, लेकिन साथ ही यह देश की न्याय-संस्था, लोकतांत्रिक स्थिरता और मानवाधिकारों के लिहाज से एक बड़े परीक्षा की घड़ी भी है। समय बताएगा कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय कैसे इस फैसले पर प्रतिक्रिया देगा, और बांग्लादेश के नागरिक अपने भविष्य के लिए किस राह का चुनाव करेंगे।
