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समाचार मिर्ची

नई दिल्ली। हिंदू धर्म के प्रमुख ग्रंथों में से एक श्रीमद्भागवत महापुराण है। ऐसा माना जाता है कि इसके पाठ या कथा को सुनने से व्यक्ति की कई तरह की मानसिक चिंताएं दूर होती हैं और जीवन में खुशहाली बनी रहती है। इस कथा को पूरे सात दिनों तक श्रवण करने से श्री कृष्ण का आशीर्वाद बना रहता है तथा इसकी शिक्षाएं जीवन में उन्नति की प्रेरणा देती हैं।

श्रीमद्भागवत महापुराण के द्वादश स्कंध के तेरहवें अध्याय में एक श्लोक है जिसमें कहा गया है कि ‘सर्ववेदान्तसारं हि श्रीभागवतमिष्यते। तद्रसामृततृप्तस्य नान्यत्र स्याद्रतिः क्वचित् ॥’ इसका अर्थ है कि श्रीमद्भागवत पुराण सभी वेदों और वेदांतों का सार है। जो व्यक्ति इस ग्रंथ के प्रेम और भक्ति रूपी रस से तृप्त हो जाता है, उसका मन फिर किसी अन्य स्थान या वस्तु में नहीं लगता।

चलते चलते बताते चले कि, श्रीमद्भागवत कथा सुनने वाले व्यक्ति को अद्भुत समझ, गहरी दृष्टि और नया नजरिया मिलता है। इससे मानसिक शांति मिलती है और सोचने की क्षमता का विकास होता है। यह भगवान विष्णु के 24 अवतारों की जीवन-कथाओं के माध्यम से दर्शन बताती है। इसमें दसवां खंड भगवान कृष्ण की कथा और लीलाओं पर आधारित है।पद्म पुराण में उल्लेख है कि श्रीमद्भागवत कथा सुनने से व्यक्ति के जीवन के कई दोष दूर होते हैं और समस्याओं से बाहर निकलने का साहस मिलता है। इससे सही और गलत की पहचान होती है। सात दिनों तक इसका श्रवण करने से मन ईश्वर में रमने लगता है और खराब सोच से मुक्ति मिलती है। इसका सार मोह माया से दूर होकर कृष्ण भक्ति में लीन होना और जीवन को नई दिशा देना है।

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