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हैदराबाद: तेलंगाना के कृषि क्षेत्र में ड्रोन तकनीक तेजी से लोकप्रिय हो रही है। राज्य के रंगारेड्डी और आसपास के ग्रामीण इलाकों में किसान अब पारंपरिक तरीके से पीठ पर टैंक लादकर छिड़काव करने की बजाय कृषि ड्रोन का उपयोग कर रहे हैं। कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) और केंद्रीय बारानी कृषि अनुसंधान संस्थान (CRIDA) के सहयोग से यह तकनीक बढ़ रही है।

रंगारेड्डी जिले के कपास, मक्का, धान और अरहर उगाने वाले किसानों के अनुसार, पहले एक एकड़ खेत में कीटनाशक छिड़कने में मजदूर को कई घंटे या पूरा दिन लग जाता था। अब ड्रोन की मदद से यह काम मात्र 5 से 10 मिनट में पूरा हो रहा है। ड्रोन फसलों पर कीटनाशक, नैनो-यूरिया और सूक्ष्म पोषक तत्वों का छिड़काव तेजी से करते हैं।

ड्रोन के इस्तेमाल से लागत में 20 से 40 प्रतिशत तक की कमी आई है। प्रति एकड़ छिड़काव का खर्च अब 300 से 600 रुपये के बीच रह गया है। पानी की खपत भी काफी कम हुई है। जहां पारंपरिक विधि में एक एकड़ के लिए करीब 400 लीटर पानी लगता था, वहीं ड्रोन केवल 30 से 40 लीटर पानी में काम पूरा कर देते हैं।इस तकनीक से किसानों को स्वास्थ्य लाभ भी मिला है क्योंकि वे अब जहरीले रसायनों के सीधे संपर्क में नहीं आते। सरकारी सब्सिडी और किसान उत्पादक संगठनों (FPOs) की मदद से छोटे किसानों की भी इस तकनीक तक पहुंच बढ़ गई है।

घंटों का काम अब मिनटों में

रंगारेड्डी जिले में कपास, मक्का, धान और अरहर जैसी प्रमुख फसलों की खेती करने वाले किसानों का कहना है कि पहले कीटनाशकों और उर्वरकों का छिड़काव एक कठिन और समय लेने वाला कार्य था। मजदूरों को पीठ पर भारी टैंक लादकर पूरे खेत में घूमना पड़ता था, जिससे एक एकड़ भूमि में छिड़काव करने में कई घंटे या कभी-कभी पूरा दिन लग जाता था।

अब ड्रोन तकनीक ने इस प्रक्रिया को पूरी तरह बदल दिया है। किसान बताते हैं कि एक एकड़ खेत में कीटनाशक या पोषक तत्वों का छिड़काव केवल 5 से 10 मिनट में पूरा हो जाता है। इससे किसानों का समय बचता है और वे अन्य कृषि कार्यों पर अधिक ध्यान दे पाते हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार ड्रोन एक निर्धारित ऊंचाई और गति पर उड़ते हुए फसलों पर समान रूप से दवा और पोषक तत्वों का छिड़काव करते हैं, जिससे खेत के हर हिस्से तक आवश्यक मात्रा पहुंचती है।

किसानों के स्वास्थ्य को भी फायदा

पारंपरिक छिड़काव के दौरान किसानों और मजदूरों का सीधा संपर्क कीटनाशकों और रासायनिक पदार्थों से होता है। लंबे समय तक ऐसे रसायनों के संपर्क में रहने से स्वास्थ्य संबंधी कई समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं।

ड्रोन तकनीक ने इस जोखिम को काफी हद तक कम कर दिया है। अब किसानों को खेत में जाकर सीधे रसायनों का छिड़काव नहीं करना पड़ता। वे सुरक्षित दूरी से ड्रोन का संचालन कर सकते हैं या प्रशिक्षित ऑपरेटरों की सहायता ले सकते हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि इससे त्वचा, श्वसन तंत्र और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं के जोखिम में कमी आती है, जो किसानों और कृषि मजदूरों के लिए एक बड़ा लाभ है।

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