ढाका। बांग्लादेश में 12 फरवरी को संपन्न हुए आम चुनावों के परिणामों ने दक्षिण एशिया की राजनीतिक तस्वीर में बड़ा बदलाव ला दिया है। बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) ने भारी बहुमत हासिल किया है और उसके अध्यक्ष तारिक रहमान अगले प्रधानमंत्री बनने जा रहे हैं। यह चुनाव 2024 के छात्र-नेतृत्व वाले जन-आंदोलन के बाद पहला बड़ा लोकतांत्रिक प्रयोग था, जिसमें अवामी लीग को प्रतिबंधित कर दिया गया था। बीएनपी को 209 से 212 सीटें मिली हैं, जबकि जमात-ए-इस्लामी के नेतृत्व वाले 11-दलीय गठबंधन को 68-70 सीटें मिली हैं। इस परिणाम को भारत के लिए ‘गुड न्यूज’ माना जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तुरंत तारिक रहमान को बधाई देते हुए कहा कि भारत एक लोकतांत्रिक, प्रगतिवादी और समावेशी बांग्लादेश के साथ हमेशा खड़ा रहेगा और दोनों देशों के बहुआयामी संबंधों को मजबूत करने के लिए उत्सुक है।
- लोकतंत्र की बहाली और स्थिर सरकार की उम्मीद
2024 के जुलाई-अगस्त आंदोलन के बाद शेख हसीना की सरकार गिरने के बाद अंतरिम सरकार (मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व में) ने चुनाव कराए। अवामी लीग की अनुपस्थिति में यह चुनाव नई राजनीतिक व्यवस्था लेकर आया है। बीएनपी को दो-तिहाई बहुमत मिलने से संवैधानिक सुधार, संसद में स्थिरता और अल्पसंख्यक सुरक्षा जैसे मुद्दों पर काम करने की क्षमता बढ़ गई है। भारत हमेशा पड़ोसी देश में लोकतंत्र और स्थिरता का समर्थन करता रहा है। मोदी सरकार ने स्पष्ट किया है कि वह तारिक रहमान की सरकार के साथ मिलकर साझा विकास लक्ष्यों को आगे बढ़ाने को तैयार है। यह स्थिरता भारत के लिए क्षेत्रीय सुरक्षा और आर्थिक सहयोग के नए अवसर खोलती है। - सीमा सुरक्षा और पूर्वोत्तर भारत की स्थिरता में सुधार की संभावना
भारत और बांग्लादेश की 4,096 किलोमीटर लंबी सीमा पूर्वोत्तर राज्यों (असम, मेघालय, त्रिपुरा, मिजोरम आदि) के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। अवामी लीग के शासन में सीमा प्रबंधन, घुसपैठ रोकथाम और संयुक्त गश्त पर अच्छा सहयोग रहा था। बीएनपी की सरकार में भी भारत उम्मीद करता है कि सीमा सुरक्षा, मानव तस्करी और उग्रवादी गतिविधियों पर सहयोग जारी रहेगा। जमात के प्रभाव में कमी से पूर्वोत्तर में उग्रवादी नेटवर्क को बाहरी समर्थन मिलने की आशंका कम हुई है। दोनों देशों के बीच सीमा समझौते, संयुक्त गश्त और इंटेलिजेंस शेयरिंग को और मजबूत करने का मौका मिलेगा, जो भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए फायदेमंद है। - आर्थिक सहयोग और कनेक्टिविटी में नई गति
बीएनपी की सरकार विकास और आर्थिक सुधारों पर फोकस कर रही है। तारिक रहमान ने ‘बांग्लादेश पहले’ का नारा दिया और निवेश, व्यापार तथा कनेक्टिविटी पर जोर दिया है। भारत बांग्लादेश का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है, जहां द्विपक्षीय व्यापार 14 अरब डॉलर से अधिक है। बीएनपी की सरकार में भारत-अमेरिका-जापान जैसे देशों के साथ संतुलित संबंधों की उम्मीद है, जो क्षेत्रीय आर्थिक सहयोग (BIMSTEC, BBIN) को बढ़ावा देगा। जल बंटवारा (तीस्ता, गंगा), कनेक्टिविटी प्रोजेक्ट्स (अगर्तला-अखौरा रेल लिंक, मैत्री सेतु, चटगांव बंदरगाह उपयोग), ऊर्जा सहयोग और निवेश में प्रगति हो सकती है। यह भारत के ‘एक्ट ईस्ट पॉलिसी’ और ‘नेबरहुड फर्स्ट’ को मजबूती देगा। - क्षेत्रीय संतुलन और चीन-पाकिस्तान प्रभाव में कमी
पिछले कुछ वर्षों में बांग्लादेश में चीन का प्रभाव बढ़ा था, खासकर बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के जरिए। बीएनपी की सरकार में भारत के साथ बेहतर संतुलन की उम्मीद है। तारिक रहमान ने पाकिस्तान के साथ संबंधों को सामान्य रखने की बात कही है, लेकिन जमात के प्रभाव में कमी से पाकिस्तान समर्थक कट्टरपंथी तत्वों को बढ़ावा मिलने की आशंका कम है। भारत क्षेत्रीय स्थिरता चाहता है, जहां बांग्लादेश न तो पाकिस्तान की ओर झुके और न ही चीन के साथ असंतुलित हो। यह परिणाम भारत के लिए एक संतुलित अवसर है, जहां वह अपने पड़ोसी के साथ मजबूत संबंध बना सके और क्षेत्र में अपना प्रभाव बढ़ा सके।
बता दें कि, बीएनपी की जीत भारत के लिए इसलिए ‘गुड न्यूज’ है क्योंकि इससे दक्षिण एशिया में स्थिरता, सुरक्षा और सहयोग के नए रास्ते खुलते हैं। मोदी सरकार ने स्पष्ट संदेश दिया है कि वह लोकतांत्रिक और समावेशी बांग्लादेश के साथ मिलकर काम करने को तैयार है। अब दोनों देशों के बीच नए दौर की शुरुआत हो सकती है, जहां साझा विकास लक्ष्य, सुरक्षा चिंताओं और क्षेत्रीय संतुलन पर सहयोग बढ़ेगा।
