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नई दिल्ली। भारत और अमेरिका के बीच हाल ही में घोषित अंतरिम ट्रेड डील (Interim Trade Deal) ने दोनों देशों के बीच व्यापार संबंधों को नई दिशा देने का दावा किया है, लेकिन कृषि क्षेत्र को लेकर उठे विवाद ने इसे विवादास्पद बना दिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसे “ऐतिहासिक” करार दिया और दावा किया कि भारत अमेरिकी उत्पादों की बड़े पैमाने पर खरीदारी करेगा, लेकिन भारत ने कृषि को अपनी ‘रेड लाइन’ बताते हुए संवेदनशील उत्पादों पर कोई बड़ी छूट नहीं दी। व्हाइट हाउस की फैक्टशीट में कई संशोधन, खासकर दालों (पल्सेस) का जिक्र हटाना और 500 अरब डॉलर खरीद को ‘कमिटेड’ से ‘इंटेंड्स’ में बदलना, इस बात का संकेत है कि अमेरिका की ‘दाल’ भारत की मजबूत स्थिति के आगे नहीं गली।

डील का फ्रेमवर्क और मुख्य बिंदु

फरवरी 2026 की शुरुआत में ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच फोन पर बातचीत के बाद दोनों देशों ने अंतरिम ट्रेड समझौते का फ्रेमवर्क जारी किया। संयुक्त बयान में कहा गया कि भारत अमेरिकी औद्योगिक वस्तुओं पर सभी टैरिफ खत्म या कम करेगा और खाद्य एवं कृषि उत्पादों की एक विस्तृत श्रृंखला पर भी छूट देगा। इसमें ड्राइड डिस्टिलर्स ग्रेन्स (DDGs), रेड सोरघम, ट्री नट्स, फ्रेश और प्रोसेस्ड फ्रूट, सोयाबीन ऑयल, वाइन और स्पिरिट्स जैसे उत्पाद शामिल हैं। अमेरिका ने भारत पर लगाए गए रेसिप्रोकल टैरिफ को 25% से घटाकर 18% कर दिया, जो टेक्सटाइल, लेदर, फुटवियर, प्लास्टिक, रबर, ऑर्गेनिक केमिकल्स, होम डेकोर, आर्टिसनल प्रोडक्ट्स और कुछ मशीनरी पर लागू होगा। कुछ उत्पादों जैसे जेनेरिक फार्मास्यूटिकल्स, जेम्स एंड डायमंड्स और एयरक्राफ्ट पार्ट्स पर टैरिफ पूरी तरह हटाने की बात कही गई है।

इस संबंध में ट्रंप ने दावा किया कि भारत अगले 5 वर्षों में अमेरिकी ऊर्जा, आईसीटी, कोल और अन्य उत्पादों की 500 अरब डॉलर से ज्यादा खरीदारी करेगा। शुरुआती फैक्टशीट में इसे “कमिटेड” कहा गया था, लेकिन संशोधन के बाद “इंटेंड्स टू बाय” कर दिया गया। इससे यह स्पष्ट हुआ कि यह बाइंडिंग कमिटमेंट नहीं है, बल्कि इरादा मात्र है। भारत ने स्पष्ट किया कि यह खरीदारी ऊर्जा (ऑयल, गैस), एयरक्राफ्ट, प्रेशियस मेटल्स, टेक्नोलॉजी प्रोडक्ट्स (GPU आदि) और कोकिंग कोल पर केंद्रित होगी। अर्थशास्त्रियों ने चेतावनी दी है कि इतनी बड़ी खरीद से भारत का ट्रेड डेफिसिट बढ़ सकता है और कमर्शियल प्रोक्योरमेंट प्रभावित हो सकता है। भारत का अमेरिका से आयात पहले से ही बढ़ रहा है, लेकिन 500 अरब डॉलर का लक्ष्य (वार्षिक औसतन 100 अरब डॉलर) काफी महत्वाकांक्षी है।

चलते चलते बता दें कि, यह अंतरिम डील व्यापक बाइलेटरल ट्रेड एग्रीमेंट (BTA) की दिशा में पहला कदम है, जो 2025 में शुरू हुआ था। इससे भारतीय निर्यात को फायदा होगा, खासकर टेक्सटाइल, फार्मा, जेम्स और एयरक्राफ्ट पार्ट्स में। अमेरिका को इंडस्ट्रियल गुड्स और कुछ एग्री प्रोडक्ट्स में बाजार मिलेगा। हालांकि, $500 अरब खरीद और कृषि एक्सेस पर अस्पष्टता बनी हुई है। किसान संगठन चिंतित हैं कि अमेरिकी सब्सिडाइज्ड उत्पाद भारतीय बाजार में दबाव डाल सकते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि डील से सप्लाई चेन मजबूत होगी, लेकिन भारत ने अपनी रेड लाइन (कृषि) पर समझौता नहीं किया।अंत में, ट्रंप की ‘दाल’ भारत की दृढ़ता के आगे नहीं गली। संशोधनों से स्पष्ट है कि दोनों पक्षों ने संतुलन बनाया है। अब मार्च 2026 तक फाइनल लीगल एग्रीमेंट की उम्मीद है। यह डील दोनों देशों के लिए अवसर है, लेकिन किसानों की सुरक्षा सबसे महत्वपूर्ण रहेगी।

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