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ढाका। बांग्लादेश में 12 फरवरी 2026 को होने वाले आम चुनाव से महज एक दिन पहले अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय में दहशत का माहौल है। मौलवीबाजार जिले के कमलगंज उपजिला स्थित चंपारा चाय बागान से 11 फरवरी को 28 वर्षीय हिंदू युवक रतन साहूकार की खून से लथपथ लाश बरामद हुई। लाश के हाथ-पैर बंधे हुए थे और शरीर पर गंभीर चोट के कई निशान थे। यह घटना चुनावी हिंसा की आशंकाओं को और बढ़ा रही है, खासकर तब जब हाल के महीनों में अल्पसंख्यकों पर हमलों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।

इस संबंध में घटना का विवरण स्थानीय निवासियों के अनुसार, 11 फरवरी की सुबह करीब 10 बजे चंपारा चाय बागान में रतन की लाश दिखी। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची। कमलगंज पुलिस स्टेशन के इंचार्ज अब्दुल अवाल ने पुष्टि की कि मृतक रतन साहूकार इसी बागान में मजदूर के रूप में काम करता था और इस्लामपुर यूनियन से संबंधित था। लाश पर गहरे घाव थे, हाथ-पैर रस्सी से बंधे हुए थे और खून से सना हुआ था। पुलिस ने शव को मौलवीबाजार सदर अस्पताल भेज दिया, जहां पोस्टमॉर्टम चल रहा है। जांच जारी है और आरोपियों की तलाश की जा रही है।

गौरतलब हैं कि, बांग्लादेश में 12 फरवरी 2026 को 13वीं संसदीय चुनाव हो रहे हैं, जो 2024 में शेख हसीना की सरकार के छात्र आंदोलन से हटने के बाद पहला बड़ा चुनाव है। अंतरिम सरकार (यूनुस मंत्रिमंडल) के तहत यह चुनाव संवैधानिक और चुनावी सुधारों पर राष्ट्रीय जनमत संग्रह के साथ हो रहा है। करीब 12.77 करोड़ मतदाता 42,779 मतदान केंद्रों पर वोट डाल रहे हैं। मतदान सुबह 7:30 से शाम 4:30 बजे तक चलेगा और परिणाम 13 फरवरी को घोषित होने की उम्मीद है।

हालांकि, चुनाव से पहले हिंसा की घटनाएं बढ़ी हैं। मानवाधिकार संगठनों और अल्पसंख्यक समूहों के अनुसार, दिसंबर 2025 से जनवरी 2026 तक कम से कम 17 हिंदुओं की हत्या हुई, 16 हिंदू घरों-मंदिरों को आग लगाई गई और महिलाओं के खिलाफ 28 हिंसा के मामले दर्ज हुए, जिनमें बलात्कार और सामूहिक बलात्कार शामिल हैं। मिरसाराई, रावजान, पिरोजपुर और सिलहट जैसे इलाकों में ऐसी घटनाएं रिपोर्ट हुईं। हाल ही में मयमंसींह में 62 वर्षीय हिंदू व्यापारी सुसेन चंद्र सरकार की चाकू मारकर हत्या हुई और नरसिंदी में एक 23 वर्षीय हिंदू युवक को जिंदा जला दिया गया।

चलते चलते बता दें कि, रतन साहूकार की हत्या बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों की बढ़ती असुरक्षा का एक और उदाहरण है। चुनाव के दिन मतदान शांतिपूर्ण हो, यह सभी की उम्मीद है, लेकिन ऐसी घटनाएं दर्शाती हैं कि राजनीतिक संक्रमण के दौर में सामाजिक सद्भाव बनाए रखना चुनौतीपूर्ण है। पुलिस जांच से उम्मीद है कि हत्या के पीछे का सच सामने आएगा और दोषियों को सजा मिलेगी। फिलहाल, हिंदू समुदाय चुनाव के दौरान सतर्क है और सुरक्षा की मांग कर रहा है। बांग्लादेश की नई सरकार के लिए अल्पसंख्यक सुरक्षा एक बड़ी परीक्षा होगी।

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