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कोलकाता।पश्चिम बंगाल की राजनीति में 2026 के विधानसभा चुनाव को लेकर एक नया मोड़ आ गया है। जनता दल यूनाइटेड (जदयू) ने स्पष्ट संकेत दिया है कि यदि राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) में सीट बंटवारे को लेकर समझौता नहीं होता है, तो पार्टी राज्य में 25 से 30 विधानसभा सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारेगी। यह घोषणा जदयू के बंगाल राज्य महासचिव सुभाष सिंह ने पटना से लौटने के बाद बुधवार को की। सिंह ने कहा कि पार्टी अब बंगाल में अपनी स्वतंत्र ताकत दिखाने के लिए तैयार है और एनडीए के साथ बातचीत विफल होने पर अलग राह चुन सकती है।

जानकारी दे दें कि, बैठक में विशेष रूप से आसनसोल विधानसभा क्षेत्र की सात सीटों पर जदयू के उम्मीदवार उतारने की संभावना पर गहन चर्चा हुई। आसनसोल क्षेत्र औद्योगिक और खनन प्रभावित होने के कारण राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जाता है। यहां जदयू की मजबूत उपस्थिति बनाने की कोशिश की जा रही है, क्योंकि पार्टी का मानना है कि इन सीटों पर अच्छा प्रदर्शन एनडीए के भीतर उसकी बातचीत की स्थिति को मजबूत कर सकता है। सुभाष सिंह ने कहा कि यदि एनडीए से सीट बंटवारे पर सहमति नहीं बनती, तो पार्टी न केवल आसनसोल बल्कि अन्य चुनिंदा क्षेत्रों में भी 25-30 सीटों पर चुनाव लड़ेगी।

बता दें कि, पश्चिम बंगाल में 2026 के विधानसभा चुनाव का विशेष महत्व है। राज्य में वर्तमान में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की सरकार है और ममता बनर्जी मुख्यमंत्री हैं। 2021 के चुनाव में टीएमसी ने भारी बहुमत हासिल किया था, लेकिन एनडीए (मुख्य रूप से बीजेपी) ने अच्छी संख्या में सीटें जीती थीं। अब जदयू की एंट्री से एनडीए की रणनीति में बदलाव आ सकता है। नीतीश कुमार, जो बिहार में एनडीए सरकार चला रहे हैं, अब बंगाल में भी अपनी भूमिका बढ़ाना चाहते हैं। जदयू का मानना है कि बंगाल में उसकी कुछ पारंपरिक समर्थक बेस मौजूद है, खासकर मुस्लिम और पिछड़े वर्गों में, जिसे मजबूत करके पार्टी चुनावी समीकरण बदल सकती है।

जानकारी दे दें कि, यह कदम नीतीश कुमार की राष्ट्रीय राजनीति में बढ़ती सक्रियता को भी दर्शाता है। पिछले कुछ वर्षों में नीतीश ने बिहार के बाहर भी अपनी पार्टी का विस्तार करने की कोशिश की है। बंगाल में जदयू की सक्रियता से एनडीए की एकता पर सवाल उठ सकते हैं, लेकिन साथ ही यह गठबंधन में संतुलन बनाने का प्रयास भी माना जा रहा है। यदि समझौता हो जाता है, तो जदयू कुछ सीटों पर चुनाव लड़ सकती है और एनडीए को मजबूती दे सकती है।

वही, राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि 2026 के चुनाव बंगाल में त्रिकोणीय मुकाबला बन सकते हैं – टीएमसी, एनडीए (बीजेपी-जदयू आदि) और अन्य छोटे दल। जदयू की अलग लड़ाई से विपक्षी वोट बंट सकता है, लेकिन यदि गठबंधन मजबूत रहता है तो टीएमसी के लिए चुनौती बढ़ सकती है। फिलहाल जदयू ने अपनी तैयारी तेज कर दी है और फरवरी के सम्मेलन से पार्टी की रणनीति और स्पष्ट होगी।

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