कनाडा। कनाडा ने अमेरिका के साथ अपनी द्विपक्षीय व्यापार वार्ता रोक दी है। प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने स्पष्ट किया कि वॉशिंगटन द्वारा अंतिम क्षणों में प्रस्तावित शर्तों में किए गए बदलाव अनुचित और आर्थिक रूप से नुकसानदेह हैं। यह फैसला अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस बयान के ठीक बाद आया, जिसमें उन्होंने कहा था कि अमेरिका को कनाडा के साथ समझौता करना चाहिए।
इस संबंध में प्रधानमंत्री कार्नी के अनुसार, हालिया बातचीत में प्रगति के बावजूद कनाडा के मुख्य उद्देश्य पूरे नहीं हो पा रहे थे। इन प्राथमिकताओं में कनाडाई व्यवसायों के लिए टैरिफ-मुक्त पहुंच हासिल करना, प्रमुख उद्योगों पर अमेरिकी टैरिफ घटाना और छोटे व मध्यम आकार के व्यवसायों की सुरक्षा सुनिश्चित करना शामिल था। कार्नी ने कहा कि पिछले 18 महीनों में कनाडा की नई सरकार ने घरेलू आर्थिक ताकत बढ़ाने, वैश्विक साझेदारियों में विविधता लाने और अमेरिका के साथ एक निष्पक्ष समझौते पर ध्यान केंद्रित किया है। हाल के हफ्तों में कनाडाई हितों को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति हुई, लेकिन यह कनाडाई लोगों के लक्ष्यों को पूरा करने के लिए पर्याप्त नहीं थी। नतीजतन, उन्होंने व्यापार वार्ता रोकने का फैसला किया और वार्ताकारों को ओटावा लौटने का निर्देश दिया। अमेरिकी प्रस्तावों ने किसी भी संभावित समझौते की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
वही , हम आपको बता दें कि, कनाडाई सरकार के मुताबिक, यह कदम तब उठाया गया जब अमेरिका आधी रात से लगभग 28 अरब कनाडाई डॉलर के सामानों पर 50 प्रतिशत टैरिफ लगाने की तैयारी में था। कार्नी ने घोषणा की कि कनाडा भी बराबर का जवाब यानी डॉलर के बदले डॉलर देते हुए समान टैरिफ लागू करेगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि कनाडा अन्य वैश्विक बाजारों में व्यापार का विस्तार करके अमेरिका पर अपनी निर्भरता कम करेगा। वर्तमान में कनाडा के मुक्त व्यापार समझौतों की पहुंच 1.5 अरब उपभोक्ताओं तक है, जिसे वर्ष के अंत तक दोगुना करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके अलावा, कनाडाई कर्मचारियों और व्यवसायों की सहायता के लिए अतिरिक्त सरकारी उपाय किए जाएंगे, जो पिछले 18 महीनों में दी गई 25 अरब कनाडाई डॉलर की मदद के क्रम में होंगे।
