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नई दिल्ली। किसान फसल में कीट लगने के बाद अक्सर रासायनिक कीटनाशकों का इस्तेमाल करते हैं, लेकिन इनका प्रभाव कीटों तक सीमित नहीं रहता। ये मिट्टी की उर्वरता, पर्यावरण और लोगों के स्वास्थ्य पर भी असर डालते हैं। ऐसे में घर पर आसानी से देसी कीटनाशक बनाने के तरीके किसानों के लिए उपयोगी साबित हो सकते हैं।अग्निअस्त्र कीटनाशक बनाने की विधि: 20 लीटर देशी गाय का गोमूत्र, 2 किलो नीम की पत्तियां, 500 ग्राम तीखी पिसी हुई मिर्च, 250 ग्राम देसी लहसुन की चटनी, 500 ग्राम तंबाकू पाउडर और 500 ग्राम अदरक की चटनी को एक बर्तन में डालकर धीमी आंच पर उबालें। ठंडा होने के बाद कपड़े से छान लें। इस मिश्रण को 100 से 200 लीटर पानी में 6 से 8 लीटर की मात्रा में मिलाकर फसलों पर छिड़काव किया जा सकता है। यह गोल करीब तीन महीने तक सुरक्षित रहता है।

नीम आधारित कीटनाशक: 5 किलो नीम की पत्तियां या निंबोली को पीसकर 100 लीटर पानी में डालें। इसमें 1 लीटर गोमूत्र और 1 किलो देशी गाय का गोबर मिलाकर लकड़ी से अच्छी तरह गोल तैयार करें। मिश्रण को ढककर 50 घंटे तक रखें और इस दौरान दिन में कम से कम तीन बार हिलाएं। दो दिन बाद छानकर दो से ढाई लीटर मिश्रण को 100 लीटर पानी में मिलाकर स्प्रे करें।3जी पेस्टिसाइड: हरी मिर्च से तैयार होने वाला यह पेस्टिसाइड कई प्रकार के कीटों और फफूंद जनित रोगों से फसल की रक्षा करता है। तीनों चीजों को पीसकर पानी में मिलाया जाता है और छानकर फसलों पर स्प्रे किया जाता है। यह फसल की वृद्धि को भी बेहतर बनाने में मदद करता है।

अग्निअस्त्र बनाने के लिए आवश्यक सामग्री

  • 20 लीटर देशी गाय का गोमूत्र
  • 2 किलो नीम की पत्तियां
  • 500 ग्राम तीखी पिसी हुई मिर्च
  • 250 ग्राम देसी लहसुन की चटनी
  • 500 ग्राम तंबाकू पाउडर
  • 500 ग्राम अदरक की चटनी

बनाने की विधि

सभी सामग्री को एक बड़े बर्तन में डालकर धीमी आंच पर अच्छी तरह उबालें। मिश्रण को पर्याप्त समय तक पकाने के बाद उसे ठंडा होने दें। इसके बाद साफ कपड़े की सहायता से छान लें।

तैयार घोल को सुरक्षित बर्तन में संग्रहित किया जा सकता है। बताया जाता है कि यह मिश्रण लगभग तीन महीने तक उपयोग योग्य रहता है, यदि इसे उचित तरीके से सुरक्षित रखा जाए।

तैयार करने की प्रक्रिया

सबसे पहले नीम की पत्तियों या निंबोली को अच्छी तरह पीस लें। इसके बाद इन्हें 100 लीटर पानी में डालें। फिर इसमें गोमूत्र और गोबर मिलाकर लकड़ी की सहायता से अच्छी तरह घोल तैयार करें।

मिश्रण को ढककर लगभग 50 घंटे तक रखा जाता है। इस दौरान दिन में कई बार इसे लकड़ी से चलाने की सलाह दी जाती है ताकि सभी तत्व अच्छी तरह मिल जाएं। निर्धारित समय पूरा होने के बाद घोल को छानकर फसलों पर छिड़काव के लिए उपयोग किया जा सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वैज्ञानिक सलाह और उचित कृषि प्रबंधन के साथ इन उपायों को अपनाया जाए, तो यह टिकाऊ और पर्यावरण-अनुकूल खेती की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है। इससे किसानों को उत्पादन लागत कम करने, मिट्टी की गुणवत्ता बनाए रखने और सुरक्षित कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देने में मदद मिल सकती है।

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