कोलकाता। असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने एक बार फिर बांग्लादेश से हो रही अवैध घुसपैठ को पूर्वोत्तर भारत के लिए सबसे बड़ी चुनौती करार दिया है। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि इस समस्या से निपटने के लिए असम, त्रिपुरा और पश्चिम बंगाल में भाजपा की सरकार होना अत्यंत आवश्यक है। सरमा का यह बयान 16 जनवरी 2026 को त्रिपुरा दौरे के दौरान आया, जब वे माता त्रिपुरा सुंदरी मंदिर में दर्शन करने गए थे।
सरमा का यह बयान बांग्लादेश में राजनीतिक अस्थिरता और वहां से हो रही संभावित घुसपैठ के संदर्भ में आया है। असम और त्रिपुरा सरकारों ने हाल के महीनों में घुसपैठियों को पकड़कर वापस भेजने (पुश बैक) की कार्रवाई तेज की है। असम में हजारों एकड़ भूमि अवैध कब्जेदारों से मुक्त कराई गई है। सरमा ने दावा किया कि उनकी सरकार ने लगभग दो लाख बीघा भूमि अवैध बांग्लादेशी बसिंदों से वापस ली है। लेकिन उन्होंने पश्चिम बंगाल सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि वहां राष्ट्रीय हित में अपेक्षित कदम नहीं उठाए जा रहे।
यह मुद्दा पूर्वोत्तर की जनसांख्यिकीय संरचना से गहराई से जुड़ा है। सरमा ने पहले भी कहा था कि अगले जनगणना के बाद असम में अल्पसंख्यक आबादी (मुख्यतः बांग्लादेश मूल के) लगभग 40 प्रतिशत हो सकती है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर हिंदू आबादी 50 प्रतिशत से नीचे चली गई, तो क्षेत्रीय सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है।
पश्चिम बंगाल का महत्व इसलिए बढ़ जाता है क्योंकि भारत-बांग्लादेश सीमा का बड़ा हिस्सा यहां से गुजरता है। सरमा का आरोप है कि तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) सरकार घुसपैठ पर सख्ती नहीं दिखा रही, जिससे घुसपैठिए असम और त्रिपुरा से वापस भेजे जाने के बाद बंगाल के रास्ते फिर से प्रवेश कर लेते हैं।
विश्लेषकों का मानना है कि घुसपैठ का मुद्दा भाजपा के लिए पूर्वोत्तर में हिंदुत्व और क्षेत्रीय अस्मिता को मजबूत करने का हथियार बन गया है। सरमा ने बार-बार कहा है कि बंगाल में भाजपा की सरकार बनी तो सीमा सुरक्षा में समन्वय बढ़ेगा, बीएसएफ के साथ बेहतर सहयोग होगा और घुसपैठ पर अंकुश लगेगा। यह न केवल असम-त्रिपुरा के लिए, बल्कि मेघालय, मिजोरम जैसे अन्य राज्यों के लिए भी फायदेमंद होगा।
