नई दिल्ली। बांग्लादेश में हाल ही में हुए चुनावों में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) की बड़ी जीत के बाद भारत-बांग्लादेश संबंधों में एक नई शुरुआत की उम्मीद जगी है। तारिक रहमान की पार्टी की जीत के साथ अंतरिम सरकार का दौर समाप्त हो गया है और नई सरकार बनने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। BNP के वरिष्ठ नेता और अंतरराष्ट्रीय मामलों के प्रभारी हुमायूं कबीर ने एक महत्वपूर्ण बयान देकर भारत के साथ मजबूत और व्यापक संबंधों की इच्छा जताई है। उन्होंने स्पष्ट संकेत दिया कि नई सरकार पाकिस्तान के साथ पहले जैसी निकटता नहीं रखेगी और क्षेत्रीय संतुलन बनाए रखते हुए भारत के साथ लोगों के स्तर पर रिश्ते मजबूत करने पर जोर देगी।
इस संबंध में हुमायूं कबीर ने इंटरव्यू में कहा, “हमारी प्राथमिकता लोगों के बीच मजबूत सहयोग और जुड़ाव बनाने की है। भारत उन देशों में शामिल होगा जहां नई सरकार के प्रतिनिधिमंडल दौरे करेंगे।” हालांकि उन्होंने किसी निश्चित तारीख का खुलासा नहीं किया, लेकिन उच्चस्तरीय दौरों को सामान्य प्रक्रिया बताया। कबीर ने जोर दिया कि संबंध सिर्फ सरकारी स्तर तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि व्यापार, निवेश, शिक्षा, संस्कृति और सामाजिक क्षेत्र में आम लोगों के स्तर पर विस्तार होगा। उन्होंने कहा, “पहले की तरह सीमित दायरे में संबंध नहीं रहेंगे, बल्कि व्यापक और संतुलित विदेश नीति अपनाई जाएगी।”
भारत-बांग्लादेश संबंधों की मजबूती के लिए कई महत्वपूर्ण क्षेत्र हैं। दोनों देशों के बीच 4,096 किलोमीटर लंबी सीमा है, जो दुनिया की सबसे लंबी स्थलीय सीमाओं में से एक है। व्यापार में भारत बांग्लादेश का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है। 2024-25 में दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार लगभग 14 बिलियन डॉलर रहा, जिसमें भारत का निर्यात ज्यादा था। नई सरकार के साथ निवेश, कनेक्टिविटी प्रोजेक्ट्स और ऊर्जा सहयोग में तेजी आने की उम्मीद है। अखौरा-अगरतला रेल लिंक, मोंगला और चटगांव बंदरगाहों तक पहुंच, और तीस्ता जल बंटवारे जैसे मुद्दों पर बातचीत आगे बढ़ सकती है।
कुल मिलाकर, BNP की जीत और हुमायूं कबीर के बयानों से भारत-बांग्लादेश संबंधों में नई ऊर्जा आने की संभावना है। उच्चस्तरीय दौरों, लोगों के स्तर पर जुड़ाव और आर्थिक सहयोग से दोनों देश लाभान्वित होंगे। यह नई शुरुआत न केवल द्विपक्षीय स्तर पर, बल्कि पूरे दक्षिण एशिया की स्थिरता और विकास के लिए सकारात्मक कदम साबित हो सकती है।
