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नई दिल्ली। शनिवार तक देशभर में मानसून की बारिश में 43 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है। मौसम विभाग (IMD) की भविष्यवाणी के अनुसार, एल नीनो के प्रभाव और भारतीय महासागर डाइपोल (IOD) की तटस्थ स्थिति के कारण इस सीजन में कुल 10 प्रतिशत से अधिक घाटे की बहुत अधिक संभावना है। IMD ने जून-सितंबर के लिए ‘नीचे सामान्य’ बारिश का पूर्वानुमान दिया है, जिसमें 60 प्रतिशत संभावना है कि बारिश 10 प्रतिशत से ज्यादा घाटे वाली रहेगी।

दिल्ली में उमस भरी गर्मी ने लोगों को परेशान किया। शनिवार दोपहर 2:30 बजे ‘फील्स लाइक’ तापमान 51.3 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया, जो इस मौसम का सबसे ऊंचा रिकॉर्ड है। अधिकतम तापमान 41.3 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सामान्य से चार डिग्री अधिक है। दोपहर 2:30 बजे नमी 45 प्रतिशत थी, जिसके कारण फील्स लाइक तापमान 50 डिग्री के पार चला गया।

1 जून से 27 जून तक के आंकड़ों के अनुसार कई राज्यों में भारी कमी दर्ज की गई। मेगालय में 82 प्रतिशत, गुजरात में 79 प्रतिशत, मणिपुर में 71 प्रतिशत, छत्तीसगढ़ में 68 प्रतिशत, झारखंड में 66 प्रतिशत, महाराष्ट्र में 59 प्रतिशत, उत्तर प्रदेश में 56 प्रतिशत, ओडिशा में 52 प्रतिशत और बिहार में 50 प्रतिशत घाटा रहा। मध्य प्रदेश में 41 प्रतिशत कमी दर्ज की गई।मध्य भारत में 57 प्रतिशत, पूर्वोत्तर और पूर्वी भारत में 44 प्रतिशत, दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत में 30 प्रतिशत तथा उत्तर-पश्चिम भारत में 27 प्रतिशत कमी आई है। विशेषज्ञों के अनुसार, यदि IOD पॉजिटिव नहीं हुआ तो एल नीनो का प्रभाव बढ़ सकता है, जिससे कृषि, जलाशयों और अर्थव्यवस्था पर असर पड़ने की आशंका है।

कई राज्यों में सामान्य से काफी कम बारिश

1 जून से 27 जून तक के उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार देश के कई राज्यों में वर्षा का बड़ा घाटा दर्ज किया गया है। सबसे अधिक कमी मेघालय में 82 प्रतिशत रही, जबकि गुजरात में 79 प्रतिशत, मणिपुर में 71 प्रतिशत, छत्तीसगढ़ में 68 प्रतिशत और झारखंड में 66 प्रतिशत कम बारिश हुई।

इसके अलावा महाराष्ट्र में 59 प्रतिशत, उत्तर प्रदेश में 56 प्रतिशत, ओडिशा में 52 प्रतिशत तथा बिहार में 50 प्रतिशत वर्षा की कमी दर्ज की गई। मध्य प्रदेश में भी 41 प्रतिशत कम बारिश रिकॉर्ड की गई है। इन राज्यों में खरीफ फसलों की बुआई पर इसका सीधा असर पड़ सकता है, क्योंकि धान, मक्का, सोयाबीन, दलहन और अन्य खरीफ फसलें शुरुआती मानसूनी वर्षा पर काफी हद तक निर्भर रहती हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि जुलाई का महीना इस वर्ष के मानसून की दिशा तय करने में निर्णायक भूमिका निभाएगा। यदि इस अवधि में व्यापक और अच्छी वर्षा होती है तो किसानों को राहत मिल सकती है, अन्यथा कई क्षेत्रों में सूखे जैसी परिस्थितियों का खतरा बढ़ सकता है।

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