भारत और अमेरिका के बीच हाल ही में घोषित ट्रेड डील को ट्रंप प्रशासन ने “ऐतिहासिक” करार दिया है। व्हाइट हाउस ने 9 फरवरी 2026 को एक विस्तृत फैक्ट शीट जारी की, जिसमें डील की प्रमुख शर्तें, लाभ और दोनों देशों के लिए फायदे स्पष्ट किए गए हैं। यह डील एक अंतरिम समझौते (Interim Agreement) का रूप है, जो व्यापक द्विपक्षीय ट्रेड एग्रीमेंट (Bilateral Trade Agreement – BTA) की दिशा में पहला कदम है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच फोन कॉल के बाद 6 फरवरी को जॉइंट स्टेटमेंट जारी हुआ था, जिसके बाद फैक्ट शीट ने विवरण दिए।
भारत को कितना फायदा?
जानकारी दे दें कि, अमेरिका ने भारत पर लगने वाले रेसिप्रोकल टैरिफ को 25% से 18% किया है, जो भारतीय निर्यातकों (टेक्सटाइल, लेदर, फुटवेयर, जेम्स एंड डायमंड्स, फार्मास्यूटिकल्स, एयरक्राफ्ट पार्ट्स आदि) के लिए राहत है। पहले यह दर 50% तक पहुंच गई थी (रेसिप्रोकल + पेनल्टी)। अतिरिक्त 25% टैरिफ हटने से भारतीय एक्सपोर्ट्स सस्ते होंगे। हालांकि, भारत ने रूसी तेल खरीद रोकने का वादा किया है, जो ऊर्जा सुरक्षा के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकता है, क्योंकि रूस भारत का प्रमुख सप्लायर रहा है। भारत ने “कैलिब्रेटेड” तरीके से बाजार खोला है, जहां संवेदनशील कृषि क्षेत्र (जैसे डेयरी, पोल्ट्री, जीएम फसलें) को सुरक्षा दी गई है। भारतीय निर्यातकों को अमेरिकी बाजार में बेहतर पहुंच मिलेगी, खासकर जीएम फार्मा और जेम्स में।
ट्रंप के “जीरो टैरिफ” दावे पर सफाई
ट्रंप ने दावा किया था कि भारत ने अमेरिकी प्रोडक्ट्स पर टैरिफ और नॉन-टैरिफ बैरियर्स को “जीरो” करने पर सहमति जताई है। फैक्ट शीट ने इसे स्पष्ट किया कि यह सभी इंडस्ट्रियल गुड्स और चुनिंदा कृषि उत्पादों पर लागू है, न कि सभी पर। कृषि में कुछ प्रोटेक्शन बरकरार रहेंगे।
दोनों देश आने वाले हफ्तों में अंतरिम एग्रीमेंट को फाइनल करेंगे और BTA की ओर बढ़ेंगे। रूल्स ऑफ ओरिजिन से सुनिश्चित होगा कि लाभ मुख्य रूप से भारत और अमेरिका को मिलें, तीसरे देशों को नहीं। डिजिटल ट्रेड रूल्स पर बातचीत होगी, जिसमें इलेक्ट्रॉनिक ट्रांसमिशन पर कस्टम ड्यूटी न लगाने का प्रावधान है।यह डील दोनों देशों के लिए “म्यूचुअल बेनिफिशियल” है, लेकिन भारत के लिए रूसी तेल पर निर्भरता कम करने और अमेरिकी ऊर्जा (LNG आदि) बढ़ाने की चुनौती है। अमेरिकी किसानों और उद्योगों को बाजार विस्तार मिलेगा, जबकि भारतीय एक्सपोर्टर्स को टैरिफ राहत। कुल मिलाकर, यह रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने वाला कदम है, जो आर्थिक और सुरक्षा हितों को जोड़ता है।
