नई दिल्ली मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच ईरान की सैन्य क्षमता एक बार फिर वैश्विक चर्चा का केंद्र बनी हुई है। जनवरी 2026 में, जब अमेरिका के साथ संबंध पहले से ही तनावपूर्ण हैं, ईरान की सेना क्षेत्रीय स्तर पर मजबूत मानी जाती है, लेकिन वैश्विक महाशक्ति अमेरिका के मुकाबले उसकी स्थिति काफी अलग है। ग्लोबल फायरपावर इंडेक्स 2025 के अनुसार, ईरान 145 देशों में 16वें स्थान पर है, जबकि अमेरिका पहले स्थान पर कायम है। ईरान का पावर इंडेक्स स्कोर 0.3048 है, जो उसकी पारंपरिक सैन्य क्षमता को दर्शाता है, लेकिन यह स्कोर तकनीकी श्रेष्ठता से ज्यादा संख्या और असममित युद्ध पर आधारित है।
ईरान की सबसे बड़ी ताकत उसका मिसाइल कार्यक्रम है, जो मध्य पूर्व में सबसे बड़ा और विविध माना जाता है। ईरान के पास 3,000 से अधिक बैलिस्टिक मिसाइलें हैं, जिनमें शॉर्ट-रेंज (SRBM) जैसे फतेह-110 (300 किमी), फतेह-313 (500 किमी) और मीडियम-रेंज (MRBM) जैसे शाहब-3 (1,300 किमी), घद्र (1,600 किमी), इमाद (1,700-1,800 किमी), सेज्जिल (2,000 किमी) और खोर्रमशहर सीरीज (2,000-3,000 किमी) शामिल हैं। ईरान ने हाल के वर्षों में सॉलिड-फ्यूल मिसाइलों पर जोर दिया है, जो लॉन्च करने में तेज और रखरखाव में आसान हैं। इसके अलावा, क्रूज मिसाइलें और हाइपरसोनिक प्रोजेक्ट्स जैसे फत्ताह भी विकास के चरण में हैं।
बता दें कि, ड्रोन ईरान की असममित युद्ध रणनीति का प्रमुख हिस्सा हैं। शाहेद सीरीज के कम घातक लेकिन सस्ते और प्रभावी ड्रोन ने यूक्रेन युद्ध में रूस को सप्लाई करके अपनी उपयोगिता साबित की है। ईरान हजारों ड्रोन का इस्तेमाल बड़े पैमाने पर हमलों के लिए कर सकता है, जो दुश्मन की एयर डिफेंस को ओवरलोड कर सकते हैं।
जानकारी दे दें कि, अमेरिका के मुकाबले ईरान की स्थिति काफी कमजोर है। अमेरिका का पावर इंडेक्स 0.0744 है, जो ईरान से कहीं बेहतर है। अमेरिका के पास 13 लाख से अधिक सक्रिय सैनिक, 14,000 से ज्यादा एयरक्राफ्ट (F-35, F-22 जैसे स्टेल्थ फाइटर), 11 एयरक्राफ्ट कैरियर, 92 डिस्ट्रॉयर और 68 सबमरीन हैं। अमेरिका की टेक्नोलॉजी, सैटेलाइट इंटेलिजेंस, साइबर क्षमता और वैश्विक बेस नेटवर्क ईरान से कई गुना आगे है। ईरान की एयर फोर्स पुरानी है (ज्यादातर 1970-80 के दशक के प्लेन), और नेवी मुख्य रूप से पर्सियन गल्फ में कोस्टल डिफेंस पर केंद्रित है।
हालांकि, 2025 के युद्ध के बाद ईरान अपनी मिसाइल और एयर डिफेंस क्षमता को तेजी से रीबिल्ड कर रहा है। ईरान के अधिकारी दावा करते हैं कि उनकी शक्ति बढ़ रही है, लेकिन प्रतिबंधों और आर्थिक दबाव के कारण चुनौतियां बनी हुई हैं। मध्य पूर्व में शांति की संभावना कम है, और ईरान अमेरिका के साथ टकराव से बचने की कोशिश कर रहा है, लेकिन क्षेत्रीय तनाव जारी रहने पर स्थिति बिगड़ सकती है।
जानकारी दे दें कि, ईरान की सैन्य ताकत क्षेत्रीय स्तर पर मजबूत है, लेकिन वैश्विक महाशक्ति अमेरिका के सामने यह मुख्य रूप से डिफेंसिव और असममित है। भविष्य में ईरान की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि वह अपनी मिसाइल-ड्रोन क्षमता को कितनी तेजी से मजबूत कर पाता है।
