झारखंड भारतीय जनता पार्टी (BJP) के कार्यकर्ता अब पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में पार्टी की जीत के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाने जा रहे हैं। फरवरी 2026 के आखिरी सप्ताह से ही झारखंड के सैकड़ों कार्यकर्ता और नेता कोलकाता से लेकर रांची तक के क्षेत्रों में सक्रिय हो जाएंगे। यह तैयारी पार्टी की रणनीति का हिस्सा है, जिसमें पड़ोसी राज्य के संसाधनों का उपयोग करके बंगाल में मजबूत चुनावी अभियान चलाया जाएगा। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह फरवरी के अंत में भाजपा के प्रवासी कार्यकर्ताओं के साथ बैठक करेंगे, जहां उन्हें अलग-अलग विधानसभा क्षेत्रों की जिम्मेदारी सौंपी जाएगी।
इस संबंध में हम आपको बता दें कि, यह पहल इसलिए खास है क्योंकि पश्चिम बंगाल की कई विधानसभा सीटें झारखंड के दुमका, जामताड़ा, धनबाद, बोकारो और रांची जिलों से सटी हुई हैं। इन सीमावर्ती क्षेत्रों में भाषाई और सांस्कृतिक समानता के कारण झारखंड के कार्यकर्ता स्थानीय मतदाताओं से आसानी से जुड़ सकते हैं। प्रदेश भाजपा ने बंगाल भाजपा को बांग्लाभाषी नेताओं की सूची सौंप दी है, ताकि प्रचार में भाषा कोई बाधा न बने। राष्ट्रीय संगठन महामंत्री बीएल संतोष ने भी झारखंड भाजपा की इन तैयारियों की समीक्षा की है और इसे सराहा है।
वही, यह भी बता दें कि, झारखंड भाजपा बिहार विधानसभा चुनाव के सफल मॉडल को अपनाने की तैयारी कर रही है। बिहार चुनाव में झारखंड के कार्यकर्ताओं को बड़े पैमाने पर लगाया गया था, जहां उन्होंने कार्यक्रम आयोजन से लेकर घर-घर जाकर मतदाताओं से संपर्क करने तक की जिम्मेदारी निभाई। अब बंगाल में भी यही रणनीति अपनाई जाएगी। कार्यकर्ताओं को बूथ स्तर पर सक्रिय रहना होगा, मतदाताओं से सीधा संवाद करना होगा और पार्टी की नीतियों, केंद्र सरकार की योजनाओं तथा स्थानीय मुद्दों पर फोकस करना होगा।
जानकारी दे दें कि, चुनाव से पहले बंगाल भाजपा के नेताओं और कार्यकर्ताओं का प्रशिक्षण कार्यक्रम धनबाद और बोकारो में आयोजित किया जाएगा। इन कार्यक्रमों में चुनावी रणनीति, मतदाता संपर्क, सोशल मीडिया का उपयोग, विरोधी दलों के आरोपों का जवाब और बूथ मैनेजमेंट जैसे विषयों पर ट्रेनिंग दी जाएगी। प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू झारखंड की तरफ से होने वाले सभी कार्यक्रमों की निगरानी करेंगे और सुनिश्चित करेंगे कि हर स्तर पर तैयारी पूरी हो।
चलते चलते बताते चले कि, , यह रणनीति भाजपा की ‘सबका साथ, सबका विकास’ की भावना को दर्शाती है, जहां एक राज्य के कार्यकर्ता दूसरे राज्य की मदद करते हैं। बंगाल चुनाव में झारखंड का योगदान पार्टी की जीत की कुंजी बन सकता है। कार्यकर्ताओं की मेहनत और नेतृत्व की रणनीति से भाजपा बंगाल में नया इतिहास रचने की ओर अग्रसर है।
