मुंबई।सुरों की कोकिला लता मंगेशकर ने 63 साल पहले सदी के सबसे यादगार देशभक्ति गीतों में से एक ‘ऐ मेरे वतन के लोगों’ गाया था। यह गाना किसी फिल्म से संबंधित नहीं है। स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर इस गीत को आज भी याद किया जाता है।लता मंगेशकर ने यह गीत 27 जनवरी 1963 को दिल्ली के राष्ट्रीय स्टेडियम में लाइव कॉन्सर्ट के दौरान हजारों की भीड़ के सामने गाया था। यह गीत 1962 में चीन के खिलाफ युद्ध में शहीद हुए भारतीय सैनिकों की शहादत के सम्मान में बनाया गया था।इस गीत का संगीत सी. रामचंद्र ने दिया था और बोल कवि प्रदीप ने लिखे थे। उस समय मंच पर पूर्व प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू भी मौजूद थे। गीत सुनकर उनकी आंखें नम हो गई थीं। 15 अगस्त के मौके पर इस देशभक्ति गीत की गूंज आज भी सुनाई देती है।
27 जनवरी 1963 को पहली बार गूंजा था गीत
‘ऐ मेरे वतन के लोगों’ का सबसे यादगार सार्वजनिक प्रदर्शन 27 जनवरी 1963 को दिल्ली के राष्ट्रीय स्टेडियम में हुआ था। गणतंत्र दिवस के तुरंत बाद आयोजित इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे। इसी मंच से लता मंगेशकर ने पहली बार इस गीत को सार्वजनिक रूप से गाया।
लता मंगेशकर की आवाज में गीत की प्रस्तुति ने वहां मौजूद लोगों को भावुक कर दिया। गीत के बोल सीधे उन भारतीय सैनिकों की वीरता और बलिदान को याद करते थे, जिन्होंने 1962 के युद्ध में देश की रक्षा करते हुए जान गंवाई थी।
उस समय भारत हाल ही में चीन के साथ हुए युद्ध के अनुभव से गुजर रहा था। ऐसे माहौल में सैनिकों के बलिदान को समर्पित इस गीत ने लोगों के मन को गहराई से छुआ।
15 अगस्त पर आज भी सुनाई देती है गूंज
हर साल 15 अगस्त यानी स्वतंत्रता दिवस के मौके पर देश के अलग-अलग हिस्सों में देशभक्ति के गीत बजाए जाते हैं। इनमें ‘ऐ मेरे वतन के लोगों’ का नाम प्रमुखता से लिया जाता है। स्कूलों के कार्यक्रमों से लेकर सांस्कृतिक आयोजनों और टीवी-रेडियो प्रसारण तक, अलग-अलग अवसरों पर यह गीत सुनाई देता है।
इसकी लोकप्रियता केवल किसी एक पीढ़ी तक सीमित नहीं रही। जिन लोगों ने इसे पहली बार 1960 के दशक में सुना था, उनके लिए यह पुरानी यादों और सैनिकों के बलिदान से जुड़ा है। वहीं युवा पीढ़ी के लिए भी यह भारतीय संगीत की एक ऐतिहासिक और भावनात्मक रचना है।
63 साल से अधिक समय बीत जाने के बावजूद ‘ऐ मेरे वतन के लोगों’ की प्रासंगिकता कम नहीं हुई है। स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर जब यह गीत सुनाई देता है, तो यह देशवासियों को उन सैनिकों की याद दिलाता है जिन्होंने देश की रक्षा के लिए अपना जीवन समर्पित किया। यही वजह है कि लता मंगेशकर की आवाज में गाया गया यह गीत भारतीय संगीत और देशभक्ति की परंपरा में आज भी एक अमर धरोहर के रूप में याद किया जाता है।
