मकर संक्रांति का पावन त्योहार आज देशभर में बड़े उत्साह से मनाया जा रहा है। यह त्योहार सूर्य देव के मकर राशि में प्रवेश का प्रतीक है, जो उत्तरायण की शुरुआत दर्शाता है। उत्तरायण में दिन लंबे होने लगते हैं और सर्दी का प्रभाव कम होता है, जिससे प्रकृति में नई ऊर्जा का संचार होता है। इस बार मकर संक्रांति 15 जनवरी 2026 को पड़ रही है, लेकिन एकादशी के साथ दुर्लभ संयोग बनने से यह और भी विशेष हो गई है। 23 साल बाद ऐसा योग बन रहा है जहां षटतिला एकादशी और मकर संक्रांति एक साथ आ रही हैं।
बता दें कि, मकर संक्रांति सूर्य के दक्षिणायन से उत्तरायण में प्रवेश का उत्सव है। वैदिक काल से यह त्योहार मनाया जाता रहा है। पौराणिक कथाओं में संक्रांति को एक देवी के रूप में वर्णित किया गया है, जिन्होंने राक्षस संकरासुर का वध किया था। यह दिन खरमास की समाप्ति का भी प्रतीक है, जो नए कार्यों के लिए अशुभ माना जाता है। उत्तरायण में सूर्य की किरणें अधिक प्रभावी होती हैं, इसलिए स्नान, दान और पूजा से पुण्य की प्राप्ति कई गुना बढ़ जाती है।
बता दें कि, इस वर्ष का संयोग बेहद दुर्लभ है। सूर्य रात 9:29 बजे मकर राशि में प्रवेश करेंगे, लेकिन मुख्य संक्रांति मुहूर्त दोपहर 3:13 बजे से शुरू होता है। साथ ही षटतिला एकादशी का योग बन रहा है, जो 23 वर्ष बाद आया है। इससे पहले ऐसा संयोग 2003 में बना था। षटतिला एकादशी पर तिल से बने व्यंजनों का दान विशेष फलदायी माना जाता है। इस संयोग से विष्णु पूजा और सूर्य उपासना दोनों का लाभ मिलता है। एकादशी होने से रात्रि में अनाज ग्रहण पर प्रतिबंध है, लेकिन संक्रांति के बाद दान-पुण्य जारी रहता है।
जानकारी दे दें कि, महा पुन्य काल: दोपहर 3:13 बजे से 4:58 बजे तक (सबसे शुभ समय, स्नान, दान और पूजा के लिए आदर्श)अमृत मुहूर्त: सुबह 7:59 बजे से 9:19 बजे तकशुभ मुहूर्त: सुबह 10:39 बजे से 11:59 बजे तकअभिजित मुहूर्त: दोपहर 11:37 बजे से 12:20 बजे तकचर-लाभ मुहूर्त: दोपहर 2:38 बजे से शाम 5:18 बजे तकब्रह्म मुहूर्त: सुबह 5:05 बजे से 5:55 बजे तकविजय मुहूर्त: दोपहर 2:23 बजे से 3:09 बजे तक
